जमीनी आवाज | विशेष पड़ताल
घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम | असित भट्टाचार्य की कलम से
जमशेदपुर से बहरागोड़ा तक कथित काली लॉटरी का नेटवर्क! टिकटों की छपाई से बिक्री तक उठे गंभीर सवाल
बंगाल की डियर लॉटरी जैसी दिखने वाली टिकटों के कारोबार की चर्चा; व्हाट्सऐप के जरिए बिक्री, कथित छपाई और वितरण नेटवर्क की निष्पक्ष जांच की मांग।
स्थानीय स्तर पर कुछ कारोबारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं, लेकिन दावों की पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी।
टिकटों की वैधता पर सवाल, आखिर कहां से आ रही हैं ये लॉटरी?
जमशेदपुर से लेकर बहरागोड़ा और आसपास के इलाकों में कथित काली लॉटरी के कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, बंगाल की डियर लॉटरी जैसी दिखने वाली टिकटों के माध्यम से कथित तौर पर लॉटरी बेचे जाने की बात सामने आ रही है। इस कारोबार का दायरा घ जमशेदपुर से बहरागोड़ा तक होने और व्हाट्सऐप के माध्यम से भी टिकटों की बिक्री किए जाने के दावे किए जा रहे हैं।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इन टिकटों की वास्तविकता क्या है? क्या ये अधिकृत लॉटरी की टिकटें हैं या इनके नाम और डिजाइन से मिलती-जुलती कोई दूसरी टिकटें बाजार में बेची जा रही हैं? इनकी वैधता की जांच किसने की है?
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही चर्चाओं में टिकटों पर 'GA' मार्क होने की बात भी कही जा रही है। हालांकि, केवल किसी मार्क या टिकट के बाहरी स्वरूप के आधार पर उसकी वैधता अथवा अवैधता तय नहीं की जा सकती। इसके लिए टिकट पर दर्ज विवरण, जारीकर्ता की पहचान और संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।

छपाई जमशेदपुर चाईबासा बहरागोड़ा में होने की चर्चा, लेकिन प्रमाण कहां हैं?
इस कथित कारोबार को लेकर एक और गंभीर सवाल टिकटों की छपाई के स्थान से जुड़ा है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इन टिकटों की छपाई चाईबासा जमशेदपुर में और संभवतः बहरागोड़ा में ही की जाती है। यदि ऐसा है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि टिकटें किस प्रेस में छपती हैं, उनका ऑर्डर कौन देता है और उन्हें बाजार तक पहुंचाने का माध्यम क्या है।
फिलहाल, छपाई के स्थान और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी प्रिंटिंग प्रेस या व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराने से पहले ठोस साक्ष्य जुटाना आवश्यक है।
स्थानीय चर्चाओं में घाटशिला का एक कपड़ा व्यापारी और एक कोचिंग संस्थान से जुड़े शिक्षक की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया जा रहा है। कुछ लोग टिकटों पर दर्ज अक्षरों को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। लेकिन शुरुआती अक्षरों, उपनामों या मौखिक चर्चाओं के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान या संलिप्तता तय नहीं की जा सकती।
जमीनी आवाज का सवाल है कि यदि इस तरह का कोई नेटवर्क वास्तव में संचालित हो रहा है, तो संबंधित विभाग इसकी जांच कर तथ्यों को सामने क्यों नहीं लाते?
व्हाट्सऐप से बिक्री का दावा, जांच के दायरे में आना चाहिए पूरा नेटवर्क
आज डिजिटल माध्यमों से किसी भी वस्तु की जानकारी और बिक्री का नेटवर्क तेजी से फैल सकता है। स्थानीय चर्चाओं में कथित लॉटरी के टिकटों की बिक्री के लिए व्हाट्सऐप का इस्तेमाल किए जाने की बात भी कही जा रही है।
यदि इस माध्यम से अनधिकृत लॉटरी बेची जा रही है, तो जांच केवल सड़क किनारे टिकट बेचने वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि टिकट कहां से आते हैं, उनका वितरण कौन करता है और बिक्री से प्राप्त राशि किसके पास पहुंचती है।
हालांकि, व्हाट्सऐप के जरिए बिक्री होने का दावा भी स्वतंत्र पुष्टि की मांग करता है। इसके लिए वास्तविक संदेशों, टिकटों, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच जरूरी है।
स्कॉर्पियो खरीदने की चर्चा, लेकिन कारोबार से संबंध साबित होना बाकी
स्थानीय चर्चाओं में यह दावा भी किया जा रहा है कि कथित लॉटरी कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति ने हाल ही में स्कॉर्पियो खरीदी है। लेकिन वाहन की खरीद और कथित कारोबार के बीच कोई प्रमाणित संबंध फिलहाल सामने नहीं आया है।
किसी व्यक्ति का वाहन खरीदना अपने आप में किसी अवैध गतिविधि का प्रमाण नहीं है। यदि जांच के दौरान अवैध कारोबार और उससे होने वाली आय के बीच संबंध स्थापित होता है, तभी उस आधार पर आगे की कार्रवाई का सवाल उठता है।
इसलिए जरूरी है कि चर्चा और प्रमाण के बीच अंतर रखा जाए तथा जांच का आधार दस्तावेज और सत्यापित तथ्य हों।
राजनीतिक जुड़ाव की चर्चा भी जांच का विषय नहीं, प्रमाण का विषय है
स्थानीय स्तर पर कथित कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति के झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़ाव की बात भी कही जा रही है। हालांकि, इस दावे और संबंधित व्यक्ति की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
किसी राजनीतिक दल से जुड़ना अपने आप में गलत नहीं है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति किसी गैरकानूनी गतिविधि में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके राजनीतिक या सामाजिक संबंधों से अलग कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
जमीनी आवाज का सवाल किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान हो। यदि किसी कारोबार को लेकर शिकायतें मौजूद हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी तरह के संभावित दबाव की आशंका को भी तथ्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए

पहले भी उठ चुके हैं सवाल, अब जवाबदेही की बारी
स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, इस कथित लॉटरी कारोबार को लेकर पहले भी खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। यदि पहले शिकायतें संबंधित अधिकारियों तक पहुंची थीं, तो यह जानना जरूरी है कि उन पर क्या कार्रवाई हुई।
क्या टिकटों की वैधता की जांच की गई? क्या कथित छपाई और वितरण के स्रोत का पता लगाया गया? क्या किसी अधिकृत विभाग ने मामले की पड़ताल की? यदि शिकायतों पर कार्रवाई हुई, तो उसका परिणाम क्या रहा?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों और उपलब्ध दस्तावेजों से ही मिल सकता है। बिना प्रमाण यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि कोई व्यक्ति किसी दबाव के कारण बच रहा है।
लेकिन यदि शिकायतों के बावजूद जांच नहीं हुई है, तो संबंधित अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अगली कड़ी में टिकटों की सीरीज और नेटवर्क पर होगी पड़ताल
जमीनी आवाज इस मामले को केवल स्थानीय चर्चा तक सीमित नहीं रखना चाहता। हमारा प्रयास होगा कि टिकटों पर दर्ज विवरण, उनकी वैधता, छपाई के स्रोत, कथित बिक्री नेटवर्क और संबंधित विभागों की भूमिका से जुड़े सत्यापन योग्य तथ्य सामने लाए जाएं।
अगली कड़ी में उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर टिकटों के विवरण और कथित नेटवर्क की पड़ताल की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित पक्ष का जवाब लेकर तथ्यों के साथ खबर प्रकाशित की जाएगी।
जमीनी आवाज का स्पष्ट संदेश है—सवाल पूछना हमारा काम है, लेकिन किसी को दोषी ठहराने का आधार प्रमाण होना चाहिए।
जमशेदपुर से बहरागोड़ा तक कथित लॉटरी कारोबार की सच्चाई क्या है? टिकट वैध हैं या नहीं? उनकी छपाई कहां होती है? और शिकायतों पर संबंधित विभाग क्या कार्रवाई करेंगे? इन सवालों के जवाब अब सामने आने चाहिए।
जमीनी आवाज इस मामले में संबंधित अधिकारियों और जिन लोगों की भूमिका को लेकर चर्चाएं हो रही हैं, उनका पक्ष भी जानने का प्रयास करेगा। पुष्टि के बाद प्राप्त जवाब को खबर में उचित स्थान दिया जाएगा।
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