‘पहले लड़े थे गोरों से, अब लड़ेंगे चोरों से’ और ‘भाग नरेंद्र, भाग नरेंद्र’ जैसे नारों से गरमाया राजनीतिक माहौल; SIR और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर केंद्रित रहा विरोध


जमीनी आवाज | नई दिल्ली | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट

दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को लोकतंत्र और मताधिकार को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली ने राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही को केंद्र में ला दिया है।

जमीनी आवाज के विशेष संवाददाता निखिल और सिद्धांत दिल्ली से इस घटनाक्रम की रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उनके द्वारा भेजे गए ग्राउंड इनपुट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के बीच सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए तीखे राजनीतिक नारे सुनाई दे रहे हैं। ‘पहले लड़े थे गोरों से, अब लड़ेंगे चोरों से’ और ‘भाग नरेंद्र, भाग नरेंद्र’ जैसे नारों ने प्रदर्शन के राजनीतिक तापमान को और बढ़ाया है।

इन नारों के पीछे केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की गंभीर आपत्तियां भी हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटाए जाने और पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंकाओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

आखिर क्यों उठ रहे हैं इतने तीखे सवाल?

भारत में मतदान केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। संविधान का अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार के सिद्धांत को आधार प्रदान करता है। ऐसे में मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम छूटना या गलत तरीके से हटना गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।

विपक्ष का कहना है कि SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए और जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें अपनी बात रखने तथा आवश्यक सुधार कराने का उचित अवसर मिलना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर INDIA गठबंधन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को रद्द करने की मांग कर रहा है।

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी मतदाता सूची का प्रबंधन और चुनाव प्रक्रिया का संचालन करना है। इसलिए आरोपों की जांच, प्रक्रिया की पारदर्शिता और आयोग की ओर से स्पष्ट जवाब लोकतांत्रिक विश्वास के लिए महत्वपूर्ण हैं।

नारों से आगे जवाबदेही की कसौटी

रामलीला मैदान से उठती आवाजों का असली महत्व इस बात में है कि देश में मताधिकार और चुनावी व्यवस्था पर खुलकर चर्चा हो रही है। सत्ता पक्ष से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है और विपक्ष के आरोपों की तथ्यात्मक जांच करना पत्रकारिता का दायित्व।

जमीनी आवाज के संवाददाता निखिल और सिद्धांत दिल्ली से इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। सवाल किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि इस बात का है कि देश का कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।

लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है। इस विश्वास की रक्षा राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रक्रिया और जवाबदेही से होगी।