जमीनी आवाज | नई दिल्ली
नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक जन महाभियोग कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची में कथित तौर पर नाम काटे जाने और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा और किसी को भी जवाबदेही से बचने नहीं दिया जाएगा।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद से हटाने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियों और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर विपक्ष की आवाज को उचित संस्थागत मंच नहीं मिल रहा है। राहुल गांधी के मुताबिक, करीब 250 विपक्षी सांसदों को एक निजी आवास के परिसर में बैठकर इस मुद्दे पर चर्चा करनी पड़ रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर स्थिति बताया।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का दावा करते हुए वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव की वैधता और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि हटाए गए मतदाता पहले वैध मतदाता थे, तो उनके नाम सूची से हटाने का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं, यदि उन्हें अब अवैध माना जा रहा है, तो वर्ष 2024 के चुनाव में उनकी भागीदारी को लेकर भी स्पष्टीकरण जरूरी है।
राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को चेतावनी देते हुए कहा कि विपक्ष इस मामले को आगे भी उठाएगा। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि विपक्ष संविधान और जनता की आवाज की रक्षा करेगा तथा कथित चुनावी अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग जारी रखेगा। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग और देशद्रोह के मुकदमे की मांग भी की। ये राहुल गांधी और विपक्ष की राजनीतिक मांगें हैं; इन्हें किसी न्यायिक निष्कर्ष या कानूनी कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने संकेत दिया कि यह कार्यक्रम विपक्ष के आंदोलन का अंतिम पड़ाव नहीं है। INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ नारे के साथ रैली आयोजित करने की घोषणा की है। ऐसे में शनिवार के प्रतीकात्मक जन महाभियोग के बाद रविवार की रैली को विपक्ष के चुनावी पारदर्शिता अभियान के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ आयोजित यह कार्यक्रम कानूनी रूप से महाभियोग की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि विपक्ष का प्रतीकात्मक राजनीतिक आयोजन था। अब इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग और सरकार की ओर से उठाए गए सवालों पर जवाब, मतदाता सूची से जुड़े दावों की तथ्यात्मक जांच और सभी पक्षों की पारदर्शी प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। लोकतंत्र में मतदाता का भरोसा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि स्पष्ट तथ्यों और जवाबदेही से मजबूत होता है।
खबरें जमीन की, जमाने की।असित भट्टाचार्य
संस्थापक एवं प्रधान संपादक...जमीनी आवाज