जमीनी आवाज | नई दिल्ली
नई दिल्ली। लोकतंत्र में मतदाता की पहचान केवल एक संख्या नहीं, बल्कि उसकी राजनीतिक भागीदारी और संवैधानिक अधिकार का आधार है। इसी मुद्दे को लेकर 31 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन के प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम में उन नागरिकों को भी शामिल किया गया, जिन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से अपने नाम हटाए जाने की शिकायत की है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। कार्यक्रम की रूपरेखा में विपक्षी नेताओं के साथ नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और मतदाता सूची से नाम हटने का दावा करने वाले नागरिकों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को केवल राजनीतिक मंच तक सीमित न रखकर प्रभावित लोगों के अनुभवों के माध्यम से सामने लाना था।
विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और पात्र नागरिक भी इससे प्रभावित हुए। गठबंधन ने मांग की कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच हो तथा जिन पात्र नागरिकों के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में शामिल किया जाए।
यहां एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है—यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो उसे समय पर इसकी जानकारी कैसे मिलेगी और अपनी शिकायत का समाधान कहां मिलेगा? चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है कि नाम जोड़ने, हटाने और सुधारने की प्रक्रिया स्पष्ट हो तथा हर शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई की जाए।
हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटने के सभी मामलों को एक ही कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा। नामों में बदलाव के पीछे मृत्यु, स्थानांतरण, दोहरी प्रविष्टि या अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए प्रत्येक मामले की तथ्यात्मक जांच और संबंधित नागरिक को अपनी बात रखने का अवसर मिलना जरूरी है
कार्यक्रम में विपक्षी नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कई आरोप लगाए और उन्हें पद से हटाने की मांग की। ये विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप हैं, जिन पर संबंधित पक्षों का जवाब और स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण है। खड़गे के आवास पर आयोजित जन महाभियोग संवैधानिक रूप से पद से हटाने की औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि विपक्ष का प्रतीकात्मक राजनीतिक आयोजन था।
जमीनी आवाज का मानना है कि चुनावी विवाद में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष आम मतदाता है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और शिकायतों का निष्पक्ष निपटारा ही लोकतंत्र में जनता का भरोसा मजबूत कर सकता है।
खबरें जमीन की, जमाने की।असित भट्टाचार्य
संस्थापक एवं प्रधान संपादक...जमीनी आवाज