मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ INDIA गठबंधन के नेताओं की मौजूदगी में दिखी झारखंडी अस्मिता की झलक; ‘वोट चोर कहां मिलेगा, बीजेपी के दफ्तर में’ के नारे पर थिरके झारखंड के कलाकार और समर्थक

जमीनी आवाज | नई दिल्ली
दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली में झारखंड ने अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान का शानदार प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में झारखंड से पहुंचे कलाकारों और समर्थकों ने अपनी पारंपरिक संस्कृति, लोककला और नृत्य के जरिए मैदान में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
राजनीतिक नारों और भाषणों के बीच झारखंडी संस्कृति की यह प्रस्तुति कार्यक्रम का एक अलग आकर्षण बनी। पारंपरिक अंदाज में सजे कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए झारखंड की समृद्ध लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की। रामलीला मैदान में उमड़े जनसमूह के बीच झारखंड की टोली ने अपनी अलग पहचान दर्ज कराई।
रैली के दौरान ‘वोट चोर कहां मिलेगा, बीजेपी के दफ्तर में’ का नारा लगाते हुए झारखंडी समर्थक और कलाकार नृत्य करते नजर आए। नारों की गूंज के साथ लोकनृत्य और पारंपरिक कलाकारी का संगम देखने को मिला। झारखंड से पहुंचे लोगों ने यह दिखाया कि उनकी पहचान केवल राजनीतिक भागीदारी तक सीमित नहीं, बल्कि उनकी अपनी विशिष्ट भाषा, कला, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत भी है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित INDIA गठबंधन के नेताओं की मौजूदगी में झारखंड की इस सांस्कृतिक भागीदारी ने रामलीला मैदान के माहौल को एक अलग रंग दिया। लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर आयोजित इस महारैली में झारखंड ने अपनी संस्कृति के माध्यम से भी उपस्थिति दर्ज कराई।
दिल्ली के रामलीला मैदान में झारखंड की यह प्रस्तुति एक संदेश दे गई कि झारखंड की पहचान उसकी मिट्टी, उसके लोकगीत, उसके नृत्य और उसकी सांस्कृतिक विरासत में भी बसती है।