असित भट्टाचार्य की रिपोर्ट
मिट्टी कहे कुम्हार से… नन्हे गतिक की आवाज ने लूटी महफिल, तालियों से गूंज उठा सम्मान समारोह!

मुसाबनी में जन्मे बाल गायक ने शिक्षकों की महफिल में बिखेरा सुरों का जादू; बहरागोड़ा विधायक समीर कुमार महंती ने पुरस्कार राशि देकर बढ़ाया हौसला।
SEVAK के मंच पर करीब 500 लोगों की मौजूदगी में गतिक की प्रस्तुति बनी आकर्षण का केंद्र; छोटे शहरों की प्रतिभाओं को अवसर देने का संदेश।
एक गीत, जिसने सुरों के साथ दिलों को भी छुआ
घाटशिला। “माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोहे… एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोहे…” कबीर के इस दोहे में जीवन का गहरा दर्शन छिपा है। लेकिन जब यही भाव एक मासूम बच्चे की आवाज में उतरकर किसी महफिल में गूंजता है, तो वह महज गीत नहीं रह जाता, बल्कि लोगों के दिलों को छू लेने वाला अनुभव बन जाता है।
कुछ ऐसा ही नजारा SEVAK संस्था के ‘एक शाम शिक्षकों के नाम’ कार्यक्रम में देखने को मिला। मुसाबनी में जन्मे नन्हे गायक गतिक पोद्दार ने अपनी गायकी से समारोह में मौजूद लोगों का मन मोह लिया। मंच पर उसका आत्मविश्वास, गीत में डूबकर गाने का अंदाज और सुरों के साथ उसका जुड़ाव ऐसा था कि सभागार में बैठे लोग तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं सके।
एक-एक अंतरा समाप्त होता और तालियों की गूंज पूरे सभागार में सुनाई देती। करीब 500 लोगों की मौजूदगी वाले इस समारोह में देखते ही देखते गतिक अपनी प्रस्तुति के कारण आकर्षण का केंद्र बन गया। उसकी गायकी ने यह अहसास कराया कि प्रतिभा को अपनी पहचान बनाने के लिए हमेशा बड़ी उम्र या बड़े मंच की जरूरत नहीं होती।

जिसके सामने गाया, उनकी पहचान से अनजान था मासूम; विधायक भी हुए प्रभावित
इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि गतिक को शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि वह जिन लोगों के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहा है, उनमें बहरागोड़ा के विधायक समीर कुमार महंती भी मौजूद हैं। उसके लिए उस समय सबसे महत्वपूर्ण था अपना गीत, अपने सुर और संगीत के प्रति लगाव।
उसे इस बात की परवाह नहीं थी कि सामने कौन बैठा है, किसका कितना बड़ा पद है या सभागार में कौन-कौन सी हस्तियां मौजूद हैं। वह अपनी धुन में गाता चला गया। उसकी प्रस्तुति ने श्रोताओं का ध्यान खींचा और गायकी से प्रभावित होकर विधायक समीर कुमार महंती ने उसे पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया। उन्होंने बच्चे को स्नेह दिया और उसकी प्रतिभा का हौसला बढ़ाया।
किसी उभरते कलाकार के लिए यह अपने आप में महत्वपूर्ण अनुभव होता है, जब उसकी कला को सराहना मिलती है और उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलती है। हालांकि, गतिक की प्रस्तुति का वास्तविक महत्व केवल पुरस्कार राशि में नहीं, बल्कि उस प्रोत्साहन में है, जो किसी बच्चे के आत्मविश्वास को मजबूत कर सकता है।

पिता को भी संगीत से लगाव, बेटे की प्रतिभा ने खींचा ध्यान
गतिक पोद्दार की प्रस्तुति के पीछे उसके परिवार का संगीत से जुड़ाव भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। बताया गया कि गतिक के पिता की भी संगीत में रुचि है। परिवार में संगीत के प्रति इस लगाव के बीच गतिक की प्रतिभा किस तरह विकसित हो रही है, यह भविष्य में देखने वाली बात होगी। फिलहाल, शिक्षकों के सम्मान समारोह में उसकी प्रस्तुति ने यह जरूर दिखा दिया कि इस बच्चे में अपनी कला को लोगों तक पहुंचाने का आत्मविश्वास है।
आमतौर पर बड़े मंच पर पहुंचकर कई बच्चे झिझकने लगते हैं। सामने बैठे लोगों की निगाहें और सैकड़ों श्रोताओं की मौजूदगी उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है। लेकिन गतिक ने जिस सहजता से गीत प्रस्तुत किया, उसने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उसकी प्रस्तुति पर गूंजती तालियां इस बात की गवाह बनीं कि संगीत की भाषा उम्र और पहचान की मोहताज नहीं होती।
SEVAK का मंच बना बाल प्रतिभा की पहचान का माध्यम
शिक्षकों के सम्मान के उद्देश्य से आयोजित SEVAK का ‘एक शाम शिक्षकों के नाम’ कार्यक्रम संगीत, सम्मान और आत्मीयता का संगम बना। 11 अक्टूबर 2026 को घाटशिला के होटल जे.एन. पैलेस में आयोजित इस समारोह में जहां शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर मिला, वहीं गतिक जैसे बाल कलाकार को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच भी प्राप्त हुआ।
किसी भी समाज में प्रतिभाएं केवल बड़े शहरों, प्रतिष्ठित संस्थानों या महंगे प्रशिक्षण केंद्रों तक सीमित नहीं होतीं। छोटे कस्बों और साधारण परिवारों में भी ऐसे बच्चे होते हैं, जिनमें आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं छिपी रहती हैं। जरूरत होती है उन्हें पहचानने, प्रोत्साहित करने और अपनी कला को निखारने के अवसर देने की।
गतिक की प्रस्तुति इसी संभावना की एक झलक है। ऐसे आयोजन तब और सार्थक हो जाते हैं, जब सम्मान के मंच पर किसी बच्चे की प्रतिभा भी सामने आती है और उसे अपनी पहचान बनाने का अवसर मिलता है। यह केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि समाज को अपनी नई पीढ़ी की प्रतिभाओं पर ध्यान देने का संदेश भी है।

मुसाबनी से बड़े मंचों तक पहुंच सकती है गतिक की आवाज, जरूरत है सही दिशा की
जमीनी आवाज का मानना है कि गतिक पोद्दार की यह प्रस्तुति केवल एक समारोह की यादगार घटना बनकर नहीं रहनी चाहिए। मुसाबनी में जन्मे इस बच्चे की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए परिवार, समाज, शिक्षकों और सांस्कृतिक संस्थाओं को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
यदि गतिक को संगीत सीखने, नियमित अभ्यास करने, अपनी गायकी को निखारने और अलग-अलग मंचों पर प्रस्तुति देने के अवसर मिलते हैं, तो वह भविष्य में अपनी अलग पहचान बना सकता है। हालांकि, किसी भी कलाकार की यात्रा निरंतर अभ्यास, उचित प्रशिक्षण, अवसर और मेहनत से आगे बढ़ती है।
आज जरूरत इस बात की है कि बच्चों की प्रतिभा को केवल तालियों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनके विकास के लिए रास्ते भी तैयार किए जाएं। स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगीत प्रशिक्षण और प्रतिभा खोज जैसी पहल से ऐसे बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
गतिक की कहानी हमें याद दिलाती है कि प्रतिभा की कोई उम्र नहीं होती और सपनों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं। मुसाबनी की मिट्टी में पनप रही इस नन्ही प्रतिभा को सही दिशा और अवसर मिलें, तो भविष्य में वह संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकती है।

जमीनी आवाज का सवाल: तालियां तो मिलीं, क्या आगे बढ़ने का अवसर भी मिलेगा?
जब छोटे शहरों और कस्बों के बच्चे अपनी प्रतिभा से सैकड़ों लोगों का दिल जीत सकते हैं, तो क्या हमारा समाज उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध करा रहा है?
गतिक पोद्दार जैसे बच्चों को मंच पर सम्मानित करना अच्छी पहल है, लेकिन उनकी प्रतिभा को पहचानकर उसे तराशने के लिए निरंतर प्रयास करना भी उतना ही जरूरी है। प्रतिभा को प्रोत्साहन तभी सार्थक परिणाम दे सकता है, जब उसके साथ सीखने, अभ्यास करने और आगे बढ़ने के अवसर भी जुड़ें।
किसी बच्चे की जिंदगी में मिला एक सही अवसर उसके भविष्य की दिशा बदल सकता है। इसलिए स्थानीय प्रतिभाओं को सामने लाना केवल परिवार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा भूमिका है।
मुसाबनी के नन्हे गायक गतिक पोद्दार को जमीनी आवाज की ओर से उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं। उसकी आवाज यूं ही गूंजती रहे, उसके सुर लोगों के दिलों को छूते रहें और उसकी प्रतिभा को आगे बढ़ने के नए अवसर मिलते रहें।
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