SEVAK की ‘एक शाम शिक्षकों के नाम’ में शिक्षकों ने बांधा समां, सम्मान के मंच पर सजी सुरों की महफिल
घाटशिला में 200 शिक्षकों का सम्मान, पुराने हिंदी और बांग्ला गीतों से गूंज उठा होटल जे.एन. पैलेस; शिक्षकों की प्रतिभा और सामाजिक सरोकारों ने कार्यक्रम को बनाया यादगार।
घाटशिला और बहरागोड़ा के दोनों विधायक अंत तक कार्यक्रम में रहे मौजूद, SEVAK के संस्थापक सौरभ चक्रवर्ती और उनकी टीम की पहल को मिली सराहना।

घाटशिला | असित भट्टाचार्य की रिपोर्ट
घाटशिला। कुछ कार्यक्रम केवल आयोजित नहीं होते, बल्कि अपने पीछे ऐसी यादें छोड़ जाते हैं, जिनकी गूंज लंबे समय तक लोगों के दिलों में बनी रहती है। घाटशिला के होटल जे.एन. पैलेस में रविवार, 11 अक्टूबर 2026 की शाम कुछ ऐसी ही रही। मंच था सामाजिक संस्था SEVAK (Social Empowerment Visionary and Kindness) का, अवसर था ‘एक शाम शिक्षकों के नाम’ का और केंद्र में थे वे शिक्षक, जो रोज दूसरों का भविष्य संवारते हैं, लेकिन अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर कम ही पाते हैं।
SEVAK ने शिक्षकों के सम्मान में एक शाम समर्पित की थी, लेकिन इस शाम को अपनी कला, संगीत और उत्साह से शिक्षकों ने ऐसा रंग दिया कि सम्मान समारोह धीरे-धीरे सुरों की खूबसूरत महफिल में बदल गया। पुराने हिंदी गीतों से लेकर बांग्ला संगीत तक, प्रस्तुतियों की ऐसी झड़ी लगी कि सभागार का माहौल संगीतमय हो उठा। शिक्षकों ने साबित कर दिया कि उनकी पहचान केवल किताबों, कक्षाओं और पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं है। उनके भीतर कला, संगीत और अभिव्यक्ति की भी एक समृद्ध दुनिया बसती है।
सम्मान के मंच पर उभरी शिक्षकों की बहुआयामी प्रतिभा
कार्यक्रम में करीब 200 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। यह केवल सम्मान-पत्र या प्रशंसा का अवसर नहीं था, बल्कि उन लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रयास था, जो अपने ज्ञान और संस्कारों से समाज की नई पीढ़ी को दिशा देते हैं।
इस शाम की सबसे खास बात रही शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी। एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने यह एहसास कराया कि शिक्षक केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं हैं। वे विद्यार्थियों को पढ़ाना, जीवन के रास्ते दिखाना और अवसर मिलने पर अपनी कला से लोगों का दिल जीतना भी जानते हैं।
पुराने हिंदी गीतों की मधुरता और बांग्ला गीतों की मिठास ने शाम को विशेष बना दिया। संगीत के माध्यम से अलग-अलग भाषाओं और भावनाओं का सुंदर संगम देखने को मिला। यह केवल मनोरंजन नहीं था, बल्कि शिक्षकों के व्यक्तित्व के उस पक्ष से परिचित होने का अवसर भी था, जो सामान्यतः कक्षा की चारदीवारी के बाहर सामने आता है।
इस आयोजन ने संदेश दिया कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों के वाहक भी हैं। उन्हें सम्मान देने का अर्थ उस पूरी परंपरा को सम्मान देना है, जिसके आधार पर एक शिक्षित, जागरूक और जिम्मेदार समाज का निर्माण होता है।

दो विधायकों की मौजूदगी ने बढ़ाया आयोजन का महत्व
कार्यक्रम में घाटशिला के विधायक सोमेश चंद्र सोरेन और बहरागोड़ा के विधायक समीर कुमार महंती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों विधायकों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। दीप प्रज्वलन में SEVAK के संस्थापक सौरभ चक्रवर्ती, बिप्लब चक्रवर्ती, सुब्रतो कुमार आदित्य, कौशिक कुमार और सोमा महतो भी शामिल रहे।
कार्यक्रम की एक उल्लेखनीय बात यह रही कि दोनों विधायक शिक्षकों की प्रस्तुतियों और पूरे आयोजन का आनंद लेते हुए अंत तक मौजूद रहे। शिक्षकों की प्रतिभा, उनकी उत्साहपूर्ण भागीदारी और सम्मान समारोह के जीवंत वातावरण ने आयोजन को विशेष बना दिया।
दोनों विधायकों ने SEVAK के संस्थापक सौरभ चक्रवर्ती और उनकी पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की। शिक्षकों को सम्मान देने के लिए सामाजिक संस्था की ओर से की गई यह पहल शिक्षा जगत के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने का माध्यम बनी।
मंच संचालन की जिम्मेदारी सुब्रतो कुमार आदित्य, गंगाधर महतो और साजिद अहमद ने संभाली। तीनों ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
SEVAK की पहल के पीछे है नशामुक्त और जागरूक समाज का संकल्प
इस आयोजन की अहमियत केवल शिक्षकों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं थी। इसके पीछे SEVAK का व्यापक सामाजिक उद्देश्य भी जुड़ा था।
संस्था के संस्थापक सौरभ चक्रवर्ती ने अपने संबोधन में संस्था के उद्देश्यों और सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि SEVAK का लक्ष्य समाज को नशामुक्त बनाना, लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और एक स्वस्थ, शिक्षित एवं बेहतर समाज के निर्माण में योगदान देना है।
उन्होंने शिक्षकों को समाज का निर्माता बताते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनमें संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं। समाज के भविष्य को आकार देने में शिक्षकों की भूमिका अतुलनीय है।
SEVAK का प्रयास है कि सामाजिक जागरूकता और जनसेवा के कार्यों में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। नशामुक्ति, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक विकास जैसे विषयों को लेकर संस्था की पहल इसी सोच का हिस्सा है।
‘एक शाम शिक्षकों के नाम’ का आयोजन भी इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में सामने आया। संस्था ने शिक्षकों को सम्मान का मंच दिया और शिक्षकों ने अपनी भागीदारी से उस मंच को जीवंत बना दिया।
नशामुक्त समाज का संदेश केवल भाषणों तक सीमित न रहे, बल्कि सामाजिक सहभागिता के माध्यम से लोगों तक पहुंचे—इस दृष्टि से भी ऐसे कार्यक्रमों का महत्व है। जब समाज के सम्मानित और जिम्मेदार वर्ग किसी सकारात्मक उद्देश्य से एक मंच पर आते हैं, तो उसका संदेश व्यापक हो सकता है।

जब सम्मान देने वाला मंच शिक्षकों की प्रतिभा का उत्सव बन गया
इस शाम का सबसे खूबसूरत पक्ष यही था कि SEVAK ने शिक्षकों को केंद्र में रखकर कार्यक्रम की परिकल्पना की और शिक्षकों ने अपनी प्रस्तुतियों से उसे एक यादगार सांस्कृतिक आयोजन का रूप दे दिया।
आमतौर पर शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानते हैं, उन्हें मंच तक पहुंचाते हैं और उनकी सफलताओं पर गर्व करते हैं। लेकिन इस कार्यक्रम में शिक्षकों को स्वयं अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। गीत-संगीत के माध्यम से उन्होंने दिखाया कि सीखने, सिखाने और जीवन को उत्सव की तरह जीने की कोई उम्र या सीमा नहीं होती।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों की भागीदारी और शिक्षकों के उत्साह ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया। यह दृश्य अपने आप में एक संदेश था कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए केवल बड़ी घोषणाओं की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी सम्मान का एक मंच, आपसी संवाद का एक अवसर और किसी अच्छे उद्देश्य के लिए साथ आने की पहल भी लोगों के बीच मजबूत संबंध बना सकती है।
SEVAK ने शिक्षकों के सम्मान के बहाने समाज को जोड़ने, उनकी प्रतिभा को पहचान देने और नशामुक्ति जैसे सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। इस आयोजन ने यह भी दिखाया कि किसी संस्था की सार्थकता केवल उसके उद्देश्य बताने में नहीं, बल्कि लोगों को उस उद्देश्य से जोड़ने में होती है।
सौरभ चक्रवर्ती और टीम की पहल को मिली सराहना
इस आयोजन को सफल बनाने में SEVAK के संस्थापक सौरभ चक्रवर्ती के साथ संस्था की पूरी टीम की भूमिका रही। कार्यक्रम में संस्था के सदस्य कौशिक कुमार, भूपेंद्र सिंह, सौगात चक्रवर्ती, सुरेश महाली, बिप्लब पात्रा, राखो नमाता, रामाशीष चटर्जी, प्राण कृष्ण मंगल, पिंटू कुमार, सजल राय, कृपा सिद्धू पाल, सोमा महतो, सुब्रतो कुमार आदित्य, सूरज लामा और उत्पल चक्रवर्ती सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
शिक्षकों को सम्मानित करने, उनके लिए सांस्कृतिक मंच उपलब्ध कराने और सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य को कार्यक्रम से जोड़ने की इस पहल की सराहना की गई।
‘एक शाम शिक्षकों के नाम’ ने एक बात स्पष्ट कर दी—जब उद्देश्य समाज को जोड़ना हो, मंच सम्मान का हो और भागीदारी दिल से हो, तो आयोजन केवल औपचारिकता बनकर नहीं रह जाता। वह लोगों की स्मृतियों का हिस्सा बन जाता है।
घाटशिला की इस शाम में SEVAK ने सम्मान का दीप जलाया और शिक्षकों ने अपने गीतों से उस रोशनी को और भी खूबसूरत बना दिया। हिंदी और बांग्ला गीतों की गूंज, शिक्षकों का उत्साह, अतिथियों की मौजूदगी और सामाजिक सरोकारों के संदेश ने मिलकर ‘एक शाम शिक्षकों के नाम’ को एक यादगार आयोजन का रूप दिया।
जमीनी आवाज की नजर में
शिक्षकों का सम्मान केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि समाज की उस नींव के प्रति आभार है, जिस पर आने वाली पीढ़ियों का भविष्य खड़ा होता है। SEVAK की यह पहल तभी और सार्थक होगी, जब सम्मान के इस मंच से निकला नशामुक्ति, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।