7-8 नकाबपोश बदमाशों ने परिवार को पिस्टल की नोक पर बनाया बंधक, बेटे ने चार अपराधियों को पकड़ने की कोशिश की; 1981 के बाद उसी घर में दोबारा डकैती की बात आई सामने
जमीनी आवाज | विजय कुमार गोप की रिपोर्ट
चांडिल, सरायकेला-खरसावां। चांडिल में हथियारबंद अपराधियों ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चांडिल बस स्टैंड के समीप लक्ष्मी ज्वेलर्स के मालिक सुरेश चौधरी के घर शुक्रवार देर रात कथित तौर पर डकैती की वारदात हुई। परिवार के अनुसार, रात करीब एक बजे से ढाई बजे के बीच 7-8 नकाबपोश बदमाश घर में घुसे और पिस्टल तथा अन्य हथियारों के बल पर परिवार के सदस्यों को बंधक बना लिया। इसके बाद सोने-चांदी के जेवरात और नकदी समेत करीब एक करोड़ रुपये की संपत्ति लूटकर फरार हो गए।
बताया गया है कि घटनास्थल चांडिल थाना से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में थाना के इतने करीब हथियारबंद अपराधियों द्वारा कथित तौर पर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिए जाने से स्थानीय लोगों और व्यापारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हालांकि, लूटी गई संपत्ति की वास्तविक कीमत और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगी।

बेटे ने चार बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की, सिर पर पिस्टल सटाने पर छोड़ा
पीड़ित परिवार के सदस्य उमंग चौधरी के अनुसार, रात करीब एक बजे 7-8 युवक चेहरे पर गमछा बांधकर घर में दाखिल हुए। सभी हथियारों से लैस थे। घर में घुसते ही उन्होंने परिवार के सदस्यों को डराकर अपने नियंत्रण में ले लिया।
इस दौरान उमंग चौधरी ने साहस दिखाते हुए चार बदमाशों को पकड़ने में सफलता हासिल की। लेकिन अपराधियों ने उनके सिर पर पिस्टल सटा दी। जान जाने के खतरे को देखते हुए उन्हें बदमाशों को छोड़ना पड़ा।
इसके बाद अपराधियों ने घर में रखे सोने-चांदी के जेवरात और नकदी समेट ली और मौके से फरार हो गए।
परिवार ने लूटी गई संपत्ति की कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई है। हालांकि, इस रकम की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। पुलिस की जांच और संपत्ति के आकलन के बाद ही लूट की वास्तविक कीमत स्पष्ट हो सकेगी।
बताया जाता है कि सुरेश चौधरी चांडिल बाजार बस स्टैंड के निवासी हैं। उनकी पहले चांडिल बाजार में सोने-चांदी की दुकान थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से व्यवसाय बंद है। परिवार के अनुसार, इसके बावजूद घर में बड़ी मात्रा में जेवरात रखे हुए थे।

थाना के करीब वारदात, पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलने के बाद चांडिल थाना प्रभारी संतन तिवारी और सर्किल इंस्पेक्टर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले की जांच शुरू कर दी।
जांच के दौरान अपराधियों के घर में प्रवेश करने के रास्ते, वारदात के बाद उनके भागने की दिशा और इस्तेमाल किए गए हथियारों समेत विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम के पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।
इस घटना ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अपराधियों ने वारदात से पहले घर की रेकी की थी? क्या उन्हें परिवार और घर में रखे कीमती सामान के बारे में पहले से जानकारी थी? क्या आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से अपराधियों के आने-जाने का कोई सुराग मिल सकता है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि थाना के इतने करीब कथित तौर पर हथियारबंद डकैती की वारदात हुई, तो अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस की आगे की रणनीति क्या होगी?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने और पुलिस द्वारा मामले का खुलासा किए जाने के बाद ही सामने आ सकेंगे।
बाजार समिति की चेतावनी: जल्द खुलासा नहीं हुआ तो आंदोलन
घटना के बाद चांडिल बाजार समिति ने नाराजगी जताते हुए पुलिस से जल्द से जल्द अपराधियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी करने की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस समय रहते मामले का खुलासा नहीं करती, तो जोरदार आंदोलन किया जाएगा।
व्यापारियों की चिंता केवल एक परिवार के साथ हुई कथित लूट तक सीमित नहीं है। उनका सवाल है कि जब थाना के इतने करीब रहने वाला परिवार भी ऐसी घटना का शिकार हो सकता है, तो बाजार के दुकानदारों और आम नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
स्थानीय व्यापारियों के लिए यह घटना सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग करने वाली है। अब पुलिस के सामने अपराधियों की पहचान करने, लूटी गई संपत्ति बरामद करने और लोगों के बीच सुरक्षा का भरोसा बहाल करने की चुनौती है।
डकैती के बीच ईमानदारी की मिसाल: मिला सोने का चेन लौटाया
इस गंभीर घटना के बीच ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी की एक सकारात्मक मिसाल भी सामने आई है।
बताया गया कि घटना की रिपोर्टिंग के लिए मौके पर पहुंचे स्थानीय अखबार के पत्रकार प्रकाश कुमार को घर की गली में सोने का एक चेन मिला। चेन की कीमत करीब दो लाख रुपये बताई गई है। आशंका जताई गई कि यह चेन डकैती के दौरान गिर गया होगा।
प्रकाश कुमार ने चेन अपने पास रखने के बजाय उसे उमंग चौधरी को लौटा दिया। अपराध और भय के माहौल के बीच पत्रकार का यह कदम ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बनकर सामने आया है।
हालांकि, चेन की कीमत और उसके घटना के दौरान गिरने की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।
1981 में भी हुई थी डकैती, करीब 45 साल बाद फिर उसी घर को बनाया निशाना
इस घटना का एक पुराना पहलू भी सामने आया है। बताया जाता है कि सुरेश चौधरी के घर में वर्ष 1981 में भी डकैती हुई थी। अब वर्ष 2026 में करीब 45 साल बाद उसी घर में दोबारा डकैती की घटना होने की बात सामने आई है।
एक ही घर में दशकों के अंतराल पर दोबारा ऐसी घटना होने से परिवार और आसपास के लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, वर्ष 1981 की घटना और वर्तमान मामले के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि अपराधियों ने वारदात को किस योजना के तहत अंजाम दिया और वे पुलिस की पकड़ से कैसे बच निकले।
जमीनी आवाज का सवाल: थाना के इतने करीब हुई डकैती का खुलासा कब?
चांडिल में हुई इस कथित हथियारबंद डकैती ने पुलिस की गश्त, अपराधियों पर निगरानी और स्थानीय व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या पुलिस जल्द अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर पाएगी? क्या परिवार की कथित तौर पर लूटी गई संपत्ति बरामद होगी? क्या बाजार समिति को सुरक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार का भरोसा मिलेगा?
इन सवालों का जवाब अब पुलिस की जांच और कार्रवाई से ही मिलेगा। स्थानीय लोगों और व्यापारियों की निगाहें मामले के खुलासे पर टिकी हैं।
जमीनी आवाज का पक्ष: हमारा उद्देश्य केवल घटना की जानकारी देना नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा से जुड़े सवालों को सामने लाना भी है। मामले में पुलिस की जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद खबर को आवश्यकतानुसार अपडेट किया जाएगा।