जमीनी आवाज | मुसाबनी | विशेष रिपोर्ट


सरकारी नौकरी केवल वेतन और सुविधाओं का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही और मर्यादित आचरण की जिम्मेदारी भी है। लेकिन जब सरकारी कार्यालय का कोई कर्मचारी ही सार्वजनिक स्थान पर कथित रूप से नशे की हालत में हंगामा करने और लोगों के साथ गाली-गलौज करने के आरोपों से घिर जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है। ऐसा ही एक मामला पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी नंबर-1 से सामने आया है, जहां घाटशिला अंचल कार्यालय में कार्यरत क्लर्क कुशल नामाता पर रविवार रात करीब 8 बजे शराब के नशे में हंगामा करने का आरोप लगा है।

मिली जानकारी के अनुसार, रविवार रात कुशल नामाता मुसाबनी नंबर-1 पहुंचे थे। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर शराब के नशे में स्थानीय लोगों के साथ अभद्र व्यवहार किया और गाली-गलौज शुरू कर दी। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें समझाने और शांत कराने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि उन्होंने किसी की बात नहीं मानी। देखते ही देखते वहां का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो जमीनी आवाज के पास उपलब्ध है। घटना को लेकर स्थानीय निवासियों में नाराजगी बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वे शुक्रवार को पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से मिलकर पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत करेंगे और निष्पक्ष जांच के साथ उचित कार्रवाई की मांग करेंगे।

बताया जाता है कि संबंधित कर्मचारी धालभूमगढ़ के निवासी हैं और घाटशिला अंचल कार्यालय में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में मुसाबनी में कथित तौर पर इस तरह का सार्वजनिक व्यवहार एक सरकारी कर्मचारी की जिम्मेदारी और आचरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। सरकारी सेवा में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी से अनुशासन, संयम और सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।

यदि आरोपों की पुष्टि होती है और कानूनी शर्तें पूरी पाई जाती हैं, तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 355 के तहत कार्रवाई की संभावना बन सकती है। इसके अलावा, जांच में जानबूझकर अपमानित कर शांति भंग करने के लिए उकसाने की बात सामने आती है तो धारा 352 तथा आपराधिक धमकी के तथ्य मिलने पर धारा 351 की भी जांच हो सकती है। कानूनी कार्रवाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

अब सवाल यह है कि क्या घाटशिला अंचल प्रशासन इस मामले का स्वतः संज्ञान लेगा? क्या उपलब्ध वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर निष्पक्ष जांच होगी? क्या शुक्रवार को उपायुक्त से मिलने जा रहे मुसाबनी के निवासियों की शिकायत पर जिला प्रशासन कार्रवाई करेगा?

सरकारी कर्मचारी यदि सार्वजनिक स्थान पर अभद्र व्यवहार के आरोपों से घिरता है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। सरकारी पद जिम्मेदारी का प्रतीक है, व्यक्तिगत मनमानी का अधिकार नहीं।

संबंधित कर्मचारी और अंचल प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

असित भट्टाचार्य की कलम से