सरायकेला-खरसावां, झारखंड | विजय कुमार गोप
खाऊ गली हत्याकांड के बाद जागा प्रशासन! अतिक्रमण पर कार्रवाई, सावन गुप्ता बोले—समय रहते चेतते तो नहीं जाती निर्दोष की जान
आदित्यपुर में वेज रोल को लेकर हुए विवाद के बाद युवक की चाकू मारकर हत्या, तीन अन्य घायल; पुलिस और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई में ठेले-गुमटियां जब्त, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल।
एक हत्या के बाद कार्रवाई, लेकिन क्या अब बदलेगी व्यवस्था?
सरायकेला-खरसावां। आदित्यपुर की खाऊ गली में मामूली विवाद के बाद हुई हत्या ने शहर की कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार देर रात आदित्यपुर स्थित आयडा (AIADA) गेट के सामने खाऊ गली में वेज रोल को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। इस घटना में एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जबकि तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद गुरुवार को पुलिस और आदित्यपुर नगर निगम की संयुक्त टीम ने इलाके में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। सड़क किनारे अवैध रूप से संचालित दुकानों को हटाने के साथ ही आवागमन में बाधा बन रहे कई लोहे के ठेले, गुमटियों और खोमचों को जब्त किया गया। कार्रवाई के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई।

पुलिस और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई, ठेले-गुमटियां जब्त
गुरुवार को आदित्यपुर थाना प्रभारी अंजनी कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल और आदित्यपुर नगर निगम की टीम खाऊ गली पहुंची। संयुक्त अभियान के दौरान सड़क किनारे और फुटपाथ पर अतिक्रमण कर संचालित की जा रही दुकानों को हटाया गया। अधिकारियों की टीम ने रास्तों को खाली कराने के साथ यातायात में बाधा उत्पन्न करने वाले ठेले, गुमटियां और खोमचे भी जब्त किए।
इस कार्रवाई को हालिया हत्याकांड के बाद प्रशासन की सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस घटना ने एक बड़ा सवाल भी सामने रखा है—क्या सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण, अव्यवस्थित दुकानों और कथित असामाजिक गतिविधियों पर समय रहते प्रभावी निगरानी रखी जाती, तो हालात को बिगड़ने से रोकने में मदद मिल सकती थी?
सावन गुप्ता ने प्रशासनिक सुस्ती पर उठाए सवाल
घटना पर आक्रोश व्यक्त करते हुए भाजपा नेता सावन गुप्ता ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खाऊ गली में अवैध दुकानों, देर शाम होने वाले जमावड़े और खुलेआम शराबखोरी की शिकायतें वह तथा स्थानीय नागरिक पहले भी नगर निगम और पुलिस प्रशासन से लिखित रूप में कर चुके थे।
सावन गुप्ता के अनुसार, यदि संबंधित विभाग समय रहते अवैध कब्जों और मुख्य मार्ग पर यातायात बाधित होने की समस्या पर सख्ती से कार्रवाई करते, तो स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती थी। उन्होंने घटना में एक निर्दोष युवक की मौत पर दुख और आक्रोश जताते हुए प्रशासनिक जवाबदेही की मांग की।
उन्होंने कहा कि केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। नगर निगम और जिला प्रशासन को स्थायी व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण न हो तथा किसी भी स्थान पर असामाजिक गतिविधियों को पनपने का अवसर न मिले।

सवाल सिर्फ अतिक्रमण का नहीं, नागरिकों की सुरक्षा का भी है
खाऊ गली में हुई हत्या ने भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अतिक्रमण अपने आप में हत्या का कारण साबित नहीं होता, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी शिकायतों की अनदेखी होने पर प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब देखना होगा कि गुरुवार को चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान केवल घटना के बाद की तात्कालिक कार्रवाई बनकर रह जाता है या प्रशासन नियमित निगरानी, यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम भी उठाता है।
एक युवक की मौत ने एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। ऐसे में जरूरी है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका कम करने के लिए प्रशासन प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करे।

जमीनी आवाज का सवाल:
क्या प्रशासन की कार्रवाई किसी बड़ी घटना के बाद ही तेज होगी, या नागरिकों की शिकायतों पर समय रहते कदम उठाकर ऐसी घटनाओं को रोकने की कोशिश भी की जाएगी? शहर की सुरक्षा के लिए जवाबदेही और निरंतर निगरानी दोनों जरूरी हैं।