सरायकेला में "वार्तालाप-2026" : स्वच्छता और पोषण की असली चुनौती जनभागीदारी पर टिकी
SWM नियम 2026 से लेकर पोषण और स्वच्छता तक मंथन, उपायुक्त बोले—व्यवहार परिवर्तन के बिना सामाजिक बदलाव संभव नहीं
भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), रांची की ओर से सरायकेला-खरसावां जिले में "वार्तालाप-2026" मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम 2026, स्वच्छता ही सेवा और पोषण माह जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। पीआईबी रांची के कार्यालय प्रमुख गौरव कुमार पुष्कर ने विषय प्रवेश कराते हुए पीआईबी की भूमिका के साथ पत्रकार कल्याण योजनाओं की जानकारी दी। पीआईबी रांची/भुवनेश्वर के अपर महानिदेशक अखिल कुमार मिश्रा ने "वार्तालाप" को पत्रकारों और सरकार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
नियम बनना आसान, जमीन पर लागू कराना असली चुनौती
कार्यशाला में SWM नियम 2026 पर विशेष चर्चा हुई। अनिल कुमार शर्मा ने क्षेत्र कवरेज के विस्तार और कचरा प्रबंधन की नई कार्यप्रणाली पर प्रस्तुति दी। कचरा कहां पैदा हो रहा है, उसे स्रोत पर कितना अलग किया जा रहा है और अंतिम निस्तारण कितना वैज्ञानिक है—यही किसी भी SWM व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा है।
उपायुक्त ने बताया—व्यवहार परिवर्तन ही बदलाव की कुंजी
उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने कहा कि व्यवहार परिवर्तन और जागरूकता के माध्यम से ही सामाजिक बदलाव संभव है। उन्होंने जिले में कुपोषण, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
पोषण सिर्फ भोजन का सवाल नहीं
कार्यशाला में चांडिल की सीडीपीओ सुप्रिया शर्मा ने 9वें पोषण माह के थीम "हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी" और इसके पांच प्रमुख स्तंभों की जानकारी दी। दूरदर्शन झारखंड के सहायक निदेशक दिवाकर कुमार ने कहा कि पोषण, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन आपस में जुड़े विषय हैं और इन्हें जनभागीदारी के अभियान के रूप में देखा जाना चाहिए।
पद्मश्री छुटनी महतो ने संघर्ष का अनुभव साझा किया
कार्यशाला में पद्मश्री छुटनी महतो ने डायन प्रथा के खिलाफ अपने संघर्ष और अनुभव साझा किए। उनका अनुभव इस बात का उदाहरण है कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ बदलाव केवल सरकारी आदेशों से नहीं आता।
अब असली सवाल क्रियान्वयन का
"वार्तालाप-2026" में योजनाओं, नियमों और अभियानों की जानकारी सामने आई, लेकिन इन सभी प्रयासों की अंतिम सफलता जमीन पर दिखाई देने वाले बदलाव से तय होगी। सरकार योजनाएं और नियम बना सकती है, लेकिन उनके स्थायी परिणाम के लिए प्रशासन, संस्थान, मीडिया और आम नागरिकों को एक साथ जिम्मेदारी निभानी होगी।





