

सरायकेला। नीमडीह थाना क्षेत्र के लुपुंगडीह पंचायत अंतर्गत उगडीह गांव में पुराने पंचायत भवन की जमीन पर कथित अवैध कब्जे, सरकारी भवन को ध्वस्त कर उसकी सामग्री बेचने तथा देवबांध की ओर जाने वाले सार्वजनिक रास्ते को दीवार खड़ी कर अवरुद्ध करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने नीमडीह के अंचल अधिकारी को लिखित आवेदन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, उगडीह गांव पहले तनकोचा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता था। वर्ष 1992 में तत्कालीन नीमडीह प्रखंड प्रमुख स्वर्गीय सुबोध गोपाल बनर्जी की सहमति से उनकी जमीन पर तनकोचा ग्राम पंचायत भवन का निर्माण कराया गया था। आवेदन में इस जमीन का खाता नंबर 62 और प्लॉट नंबर 45 बताया गया है।
बाद में तनकोचा पंचायत के स्थान पर लुपुंगडीह ग्राम पंचायत का गठन हुआ और वहां नए पंचायत भवन का निर्माण होने के बाद पंचायत कार्यालय भी स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद उगडीह स्थित पुराना पंचायत भवन उपयोग में नहीं रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी परिस्थिति का फायदा उठाकर पंचायत भवन की जमीन पर निजी कब्जे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
फर्जी केवाला और नामांतरण का आरोप, 20 डिसमिल जमीन का 23 डिसमिल हुआ दाखिल-खारिज?
ग्रामीणों ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि प्रशांत महतो एवं दिलीप महतो ने बलरामपुर, पश्चिम बंगाल निवासी स्वर्गीय गिरिराज अग्रवाल से कथित तौर पर केवाला कराकर उक्त जमीन का अपने नाम पर नामांतरण करा लिया। ग्रामीणों का दावा है कि जिस जमीन पर पंचायत भवन निर्मित था, वह स्वर्गीय सुबोध गोपाल बनर्जी के नाम से दर्ज थी।
आवेदन में जमीन का रकबा 20 डिसमिल बताया गया है, जबकि ग्रामीणों के अनुसार नामांतरण 23 डिसमिल का कराया गया। इस अंतर को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रशांत महतो एवं दिलीप महतो की जमीन की डीड में भी पूर्व दिशा में पंचायत भवन का उल्लेख है, जो इस मामले की जांच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकता है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि प्रशांत महतो, पिता प्रफुल्ल महतो, ग्राम जानुम द्वारा पुराने पंचायत भवन को अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया गया तथा भवन की ईंट, छड़, खिड़की और दरवाजे सहित अन्य सामग्री बेच दी गई। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी उपयोग में रहे भवन और उससे जुड़ी संपत्ति के संरक्षण को लेकर गंभीर मामला बनता है।

सार्वजनिक रास्ते पर दीवार, जगह-जगह गड्ढे खोदकर आवागमन बाधित करने का आरोप
ग्रामीणों ने पंचायत भवन के बगल से देवबांध की ओर जाने वाले रास्ते पर दीवार खड़ी कर आवागमन बाधित करने का भी आरोप लगाया है। इसके अलावा रास्ते में जगह-जगह गड्ढे खोदकर उसे अवरुद्ध किए जाने की शिकायत की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक रास्ते पर इस तरह का अवरोध खड़ा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल स्थल निरीक्षण कर रास्ते को अवरोधमुक्त कराने की मांग की है।
गरीब आदिवासी महिला की जमीन पर भी कब्जे का आरोप
मामले में ग्रामीणों ने एक अन्य गंभीर शिकायत भी उठाई है। आवेदन के अनुसार, मंजुड़ा मांझियान, पति रमेश मांझी, ग्राम रसुनिया की जमीन पर प्रशांत महतो एवं प्रफुल्ल महतो द्वारा कथित रूप से कब्जा कर मकान बना लिया गया है। ग्रामीणों ने इसे गरीब आदिवासी परिवार की जमीन से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए जमीन की जांच और वास्तविक भू-स्वामित्व के आधार पर उचित कार्रवाई की मांग की है।
दस्तावेजों के साथ प्रशासन के दरवाजे पहुंचे ग्रामीण
ग्रामीणों ने अपने आवेदन के साथ अंचल अधिकारी नीमडीह के जांच प्रतिवेदन, प्रशांत महतो एवं दिलीप महतो की डीड, मंजुड़ा मांझियान की जमीन से संबंधित डीड तथा अनुमंडल पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी के पूर्व पत्रों की छायाप्रति भी संलग्न की है। इससे स्पष्ट है कि ग्रामीण इस मामले को केवल मौखिक शिकायत तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि दस्तावेजों के आधार पर प्रशासनिक जांच और कार्रवाई चाहते हैं।
अब प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
ग्रामीणों की मांग है कि पुराने पंचायत भवन की जमीन की अभिलेखों के आधार पर जांच कराई जाए, कथित अवैध नामांतरण की वैधता की पड़ताल हो, सार्वजनिक रास्ते से दीवार और अन्य अवरोध हटाए जाएं तथा मंजुड़ा मांझियान की जमीन पर कथित कब्जे की जांच कराई जाए। साथ ही पंचायत भवन को ध्वस्त कर उसकी सामग्री बेचने के आरोप की भी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 1992 में पंचायत के सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्मित भवन की जमीन निजी नामांतरण तक कैसे पहुंची? यदि जमीन और नामांतरण से जुड़े दस्तावेजों में अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? और ग्रामीणों को सार्वजनिक रास्ते पर निर्बाध आवागमन का अधिकार कब मिलेगा?
जमीनी आवाज की नजर अब नीमडीह अंचल प्रशासन की अगली कार्रवाई पर रहेगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और पंचायत की जमीन को कथित अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए नियमानुसार ठोस कदम उठाए जाएंगे।
जमीनी आवाज | खबरें जमीन की जमाने की