दरोगा जी, चोरी हो गई!… लेकिन ताले के पीछे आखिर क्या है?
बीडीएसएल महिला कॉलेज में चाबी का रहस्य गहराया, नई प्राचार्या को थाना पहुंचने की नौबत क्यों? पुराने विवादों के बीच उठे कई गंभीर सवाल
ताले बंद हैं… चाबी किसके पास है? रिकॉर्ड में क्या है? और आखिर कॉलेज में चल क्या रहा है?
बलदेव दास संतलाल महिला कॉलेज एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला केवल प्रबंधन का नहीं, बल्कि कॉलेज के बंद कार्यालयों और उनकी चाबियों का है।
कुछ दिन पूर्व कॉलेज की वर्तमान प्राचार्या पुष्कर बाला तत्कालीन घाटशिला थाना प्रभारी राजेंद्र कुमार मुंडा के पास पहुंचीं। बताया गया कि कॉलेज के ऑफिस से जुड़े विभिन्न स्थानों पर ताले लगे हैं और कार्यालयीन कामकाज के लिए आवश्यक चाबियां उपलब्ध नहीं होने की समस्या सामने आ रही है।
अब सवाल सीधा है— जब कॉलेज की जिम्मेदारी नई प्राचार्या के पास है, तो कार्यालयों की चाबी उनके पास क्यों नहीं है?
पुराना विवाद खत्म हुआ या सिर्फ चेहरे बदले?
बीडीएसएल महिला कॉलेज का विवाद कोई नया अध्याय नहीं है। कॉलेज की पुरानी कमेटी, उसके पदाधिकारियों और प्रबंधन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
पुरानी व्यवस्था में कुमार सत्यम श्रीवास्तव सचिव की भूमिका में थे। बाद में प्रबंधन में बदलाव हुआ और कॉलेज से जुड़े कई पुराने विवादों के बीच नई व्यवस्था सामने आई। इसी घटनाक्रम में तत्कालीन प्राचार्या पुष्पा गुप्ता को लेकर भी आरोप और विवाद सामने आते रहे। बाद में पुष्कर बाला को प्राचार्या की जिम्मेदारी दी गई। इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय विधायक सोमेश चंद्र सोरेन की पहल की चर्चा भी सामने आई थी।
लेकिन सवाल अभी भी वहीं खड़ा है— अगर व्यवस्था बदल गई तो पुराने ताले क्यों नहीं खुले? पुष्पा गुप्ता चाबी क्यों नहीं सौंप रहीं?
यहां जमीनी आवाज किसी पर आरोप नहीं लगा रहा, बल्कि उस सवाल को सामने रख रहा है जिसका जवाब संबंधित व्यक्ति ही दे सकते हैं।
क्या यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विवाद है? या फिर बंद कमरों में रखे रिकॉर्ड, फाइलें और दस्तावेज किसी बड़े विवाद की कड़ी हो सकते हैं? सूत्रों के हवाले से कॉलेज से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं, लेकिन जमीनी आवाज बिना दस्तावेज या आधिकारिक जांच के किसी व्यक्ति को वित्तीय घोटाले में शामिल नहीं बता रहा है।
और कहानी में आता है S.K. पति का नाम
कॉलेज से जुड़े विवादों में S.K. पति का नाम भी चर्चा में रहा है। कांग्रेस नेता Tapos Chatterjee ने एक सार्वजनिक मौके पर S.K. पति को लेकर बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए उन्हें "गुंडा" तक कहा था। लेकिन उस समय सामने मौजूद लोगों के अनुसार, S.K. पति की ओर से उस आरोप का कोई तत्काल सार्वजनिक जवाब नहीं आया।
अगर आरोप गलत था तो जवाब क्यों नहीं आया? और अगर आरोप निराधार था तो क्या S.K. पति ने कभी सार्वजनिक रूप से उसका खंडन किया? जमीनी आवाज इस मामले में उनका पक्ष भी सामने रखने के लिए तैयार है।
जमीनी आवाज के सीधे सवाल
- नई प्राचार्या के पास कॉलेज के सभी कार्यालयों की चाबी क्यों नहीं है?
- यदि चाबी किसी पूर्व पदाधिकारी या कर्मचारी के पास है तो उसे तत्काल सौंपने में क्या बाधा है?
- क्या बंद कार्यालयों में कॉलेज के वित्तीय एवं प्रशासनिक रिकॉर्ड मौजूद हैं?
- यदि सब कुछ सामान्य है तो चाबी और रिकॉर्ड को लेकर पुलिस तक मामला क्यों पहुंचा?
- तत्कालीन थाना प्रभारी के सामने मामला आने के बाद क्या कार्रवाई हुई?
- नए थाना प्रभारी के सामने यह मामला दोबारा क्यों पहुंच रहा है?
- Tapos Chatterjee द्वारा S.K. पति पर लगाए गए गंभीर आरोपों का S.K. पति की ओर से कभी स्पष्ट सार्वजनिक जवाब आया या नहीं?
अब जांच जरूरी है
कॉलेज किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है। यह छात्राओं की शिक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़ा संस्थान है। इसलिए कॉलेज के कार्यालयों में रखे दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, प्रशासनिक फाइलें और संस्थागत संपत्ति किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं हो सकती।
सबसे सरल रास्ता यही है— ताले खोलिए। रिकॉर्ड सामने लाइए। चाबी का विवाद खत्म कीजिए। और यदि किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता की शिकायत है तो स्वतंत्र जांच कराइए। दोष है तो सामने आएगा, दोष नहीं है तो संदेह भी खत्म होगा।
दरोगा जी, चोरी हो गई! लेकिन जमीनी आवाज पूछ रहा है—"दरोगा जी, चोरी क्या हुई?" चाबी गायब है? रिकॉर्ड गायब है? जवाबदेही गायब है? या फिर सिर्फ कॉलेज के कमरों पर ताला है और सवालों पर भी?
जमीनी आवाज किसी को दोषी घोषित नहीं कर रहा। हम सिर्फ इतना चाहते हैं—ताले खुलें… रिकॉर्ड सामने आएं… जांच हो… और सच जनता के सामने आए।





