मुसाबनी/बेनासोल। असित भट्टाचार्य


किसी महिला के हाथ में जब हुनर आता है, तो वह सिर्फ एक काम नहीं सीखती—वह अपने परिवार की आर्थिक मजबूती, अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और अपने आत्मसम्मान की एक नई राह तैयार करती है। इसी सोच को जमीन पर उतारने की कोशिश मुसाबनी प्रखंड की बेनासोल पंचायत में दिखाई दी, जहां पंचायत सचिवालय में ‘हुनर के संग जीवन के रंग’ कार्यक्रम के तहत महिलाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण की शुरुआत हुई।

सक्षम झारखंड कौशल विकास योजना के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण में पहले दिन करीब 80 महिलाएं शामिल हुईं। सरडा, पूर्णापानी, केंद्राडीह, सौदा सहित बेनासोल क्षेत्र की महिलाओं ने उत्साह के साथ प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को ऐसे हुनर से जोड़ना है, जिसका इस्तेमाल वे आगे चलकर रोजगार, स्वरोजगार अथवा अपनी आय बढ़ाने के लिए कर सकें।

सिलाई से लेकर नर्सिंग और डाटा एंट्री तक—कई रास्ते, एक मंजिल

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को सैंपलिंग/टेलरिंग, डाटा एंट्री ऑपरेटर, नर्सिंग और ब्यूटीशियन जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रशिक्षण स्थल पर महिलाओं के हाथों में कपड़े और सिलाई का काम सिर्फ एक अभ्यास नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का नमूना दिखाई दे रहा था। महिलाएं कपड़ों से आकर्षक और उपयोगी सैंपल तैयार कर रही थीं। प्रशिक्षण के प्रति महिलाओं का उत्साह बता रहा था कि गांव की महिलाएं अब सिर्फ योजनाओं की लाभार्थी बनकर नहीं, बल्कि अपने हुनर के दम पर आर्थिक रूप से मजबूत बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं।

कौशल विकास कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ाना है। गांव के स्तर पर इस तरह का प्रशिक्षण उपलब्ध होना उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके लिए दूर शहरों तक जाकर प्रशिक्षण लेना आसान नहीं होता।

तीन बार की मुखिया सुकुर मुनि हेंब्रम ने महिलाओं को दिखाई आगे बढ़ने की राह

बेनासोल पंचायत की मुखिया सुकुर मुनि हेंब्रम लगातार तीन बार से पंचायत का नेतृत्व कर रही हैं। क्षेत्र में अपने विनम्र व्यवहार और कुशल कार्यशैली के लिए पहचानी जाने वाली मुखिया इस प्रशिक्षण को केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव का अवसर मानती हैं।

उन्होंने क्षेत्र की महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक महिलाएं प्रशिक्षण से जुड़ें और इस पहल का लाभ उठाएं। उनका कहना है कि महिलाओं के हाथ में हुनर होगा तो परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।

मुखिया के अनुसार गांव की महिलाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि उस प्रतिभा को सही प्रशिक्षण और अवसर मिले। यही कारण है कि पंचायत स्तर पर आयोजित यह प्रशिक्षण महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण बन जाता है।

पंचायत सचिवालय से निकल सकता है आत्मनिर्भरता का रास्ता

ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि अनेक महिलाएं परिवार और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण बाहर जाकर नौकरी नहीं कर पातीं। ऐसे में यदि गांव के आसपास ही उन्हें प्रशिक्षण और आगे काम करने के अवसर मिलें, तो वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ अपनी आय का साधन भी तैयार कर सकती हैं।

टेलरिंग सीखने वाली महिला आगे चलकर घर से सिलाई का काम शुरू कर सकती है। ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण लेने वाली महिला स्थानीय स्तर पर अपनी सेवा शुरू कर सकती है। डाटा एंट्री का प्रशिक्षण डिजिटल रोजगार की संभावनाओं का रास्ता खोल सकता है, जबकि नर्सिंग जैसे क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के साथ रोजगार की संभावनाओं से जुड़ते हैं।

यानी हुनर के ये छोटे-छोटे कदम भविष्य में परिवारों की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं।

योजना की असली सफलता प्रशिक्षण के बाद रोजगार में

किसी भी कौशल विकास कार्यक्रम की असली सफलता सिर्फ प्रशिक्षण पूरा करने या प्रमाणपत्र हासिल करने में नहीं, बल्कि प्रशिक्षण के बाद व्यक्ति को रोजगार अथवा स्वरोजगार से जोड़ने में होती है।

इसलिए बेनासोल में शुरू हुआ यह प्रयास तभी पूरी तरह सफल माना जाएगा, जब प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को आगे अपने हुनर का इस्तेमाल करने के लिए बाजार, रोजगार, स्वरोजगार और आवश्यक मार्गदर्शन भी मिले।

अगर प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को काम से जोड़ने की व्यवस्था मजबूत होती है, तो यह पहल गांव की अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

जमीनी आवाज का सवाल—क्या गांव की महिलाएं अब अपने हुनर से अपनी कहानी लिखेंगी?

बेनासोल की यह तस्वीर सिर्फ एक प्रशिक्षण कार्यक्रम की तस्वीर नहीं है। यह उस बदलाव की तस्वीर है, जिसमें गांव की महिलाएं अपने हाथों में हुनर लेकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

पहले दिन करीब 80 महिलाओं ने शुरुआत की है। जरूरत है कि यह संख्या आगे बढ़े और प्रशिक्षण सिर्फ प्रमाणपत्र तक सीमित न रह जाए।

सरकार की योजना, पंचायत का सहयोग और महिलाओं का हुनर—अगर इन तीनों का सही मेल हो जाए तो गांव की महिला सिर्फ रोजगार पाने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली भी बन सकती है।

बेनासोल पंचायत से उठी यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि महिला सशक्तीकरण का सबसे मजबूत अर्थ यही है—महिला के हाथ में हुनर, हुनर के बदले सम्मान और सम्मान के साथ अपनी कमाई।

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रिपोर्ट: असित भट्टाचार्य