मुसाबनी, 2 अक्टूबर..... असित भट्टाचार्य

मुसाबनी नंबर-1 की मुख्य सड़क पर गुरुवार को हाथ में माइक और छोटा-सा बॉक्स लेकर एक व्यक्ति लोगों के बीच अपनी आवाज पहुंचा रहा था। वह किसी राजनीतिक सभा के लिए लोगों को नहीं बुला रहा था। उसका सवाल सीधा था—मुसाबनी के लोगों को बेहतर अस्पताल कब मिलेगा?

गांधी के अनुयायी और सामाजिक कार्यकर्ता गौरव क्रांति गुरु की आवाज में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंता साफ सुनाई दे रही थी। उन्होंने लोगों से अपील की कि मुसाबनी में बेहतर अस्पताल की मांग को लेकर होने वाले आंदोलन में शामिल हों।

एक दिन बाद, गांधी जयंती के अवसर पर यही आवाज मुसाबनी के गांधी पार्क में धरने के रूप में दिखाई दी। घाटशिला अनुमंडल जन अधिकार मंच के बैनर तले आयोजित एक दिवसीय धरने में लोगों ने महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि दी और मुसाबनी में अतिरिक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग उठाई।

लेकिन इस आंदोलन की असली वजह सिर्फ एक सरकारी अस्पताल की मांग नहीं है। इसके पीछे मुसाबनी और आसपास के गांवों की वह स्वास्थ्य व्यवस्था है, जहां समय पर इलाज मिलना आज भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

खटिया पर अस्पताल जाती गर्भवती महिला की तस्वीर ने पूछे कई सवाल

कुछ समय पहले मुसाबनी क्षेत्र के तुमंगकोचा गांव से सामने आई एक तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने ला दिया था। एक गर्भवती महिला को खटिया पर बैठाकर चार लोग अपने कंधों पर अस्पताल की ओर ले जाते दिखाई दिए।

यह तस्वीर सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं थी। उसने उस सवाल को फिर सामने ला दिया कि जब किसी गांव में एंबुलेंस या सुगम रास्ते से अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो, तो स्वास्थ्य व्यवस्था की पहुंच का दावा जमीन पर कितना सच है?

जमीनी आवाज ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी से लेकर जमशेदपुर के उपायुक्त स्तर तक मामले की ओर ध्यान गया और गांव तक प्रशासनिक स्तर पर पहुंच बनाने की कोशिश हुई। लेकिन ग्रामीणों की समस्याओं के स्थायी समाधान को लेकर अब भी सवाल कायम हैं।

यही वजह है कि मुसाबनी में स्वास्थ्य सुविधा के सवाल को लेकर आंदोलन ने अब गांधीवादी रास्ता पकड़ लिया है।

गौरव क्रांति गुरु बोले—हिंसा नहीं, अहिंसा से लड़ेंगे

धरने के दौरान गौरव क्रांति गुरु ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की मांग को लेकर है।

उनका कहना है कि मुसाबनी में तत्काल बेहतर अस्पताल की दिशा में काम शुरू होना चाहिए। यदि मांग पर ठोस पहल नहीं होती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए भूख हड़ताल का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

गौरव क्रांति गुरु का कहना है कि गांधी ने जिस अहिंसा के रास्ते को अपनाकर लड़ाई लड़ी, वही रास्ता आज भी जनता की आवाज को मजबूती दे सकता है। उनके अनुसार हिंसा, छल या टकराव के बजाय शांतिपूर्ण और अहिंसक संघर्ष के जरिए जनहित की मांग को आगे ले जाना ही उनका संकल्प है।

HCL की खनन गतिविधियां शुरू होंगी तो अस्पताल का सवाल और बड़ा होगा

धरने में एक और महत्वपूर्ण मांग उठी—Hindustan Copper Limited (HCL) के पुराने अस्पताल को फिर से चालू किया जाए।

मुसाबनी क्षेत्र में HCL की खनन गतिविधियां दोबारा शुरू होने की बात सामने आने के बीच आंदोलनकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों और आसपास के ग्रामीणों के लिए पहले से मौजूद स्वास्थ्य ढांचे का भी उपयोग होना चाहिए।

झारखंड हाईकोर्ट, रांची के अधिवक्ता एवं समाजसेवी मदन मोहन सोरेन ने कहा कि संविधान नागरिकों को जीवन का अधिकार देता है और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जनहित का महत्वपूर्ण विषय है।

सेवानिवृत्त प्रोफेसर वीरेंद्र नाथ घोष ने भी कहा कि स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने और मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही।

गांधी को नमन करने में विरोध भी नहीं—मुसाबनी से निकला बड़ा संदेश

2 अक्टूबर को गांधी पार्क में एक दृश्य ऐसा भी था, जिस पर गौर करना जरूरी है। राजनीतिक और सामाजिक मतभेद अपनी जगह रहे होंगे, लेकिन गांधी और शास्त्री को श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों ने सिर झुकाया।

गांधी की तस्वीर के सामने खड़े होकर स्वास्थ्य सुविधा की मांग उठाना इस आंदोलन को एक अलग संदेश देता है—जनता के सवालों की लड़ाई केवल नारों और टकराव से नहीं, शांतिपूर्ण जनदबाव से भी लड़ी जा सकती है।

मुसाबनी के लोगों के सामने अब सवाल यह है कि यह धरना सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम बनकर रह जाएगा या प्रशासन इस आवाज को सुनकर स्वास्थ्य सुविधा की दिशा में ठोस कदम उठाएगा?

गांधी जयंती पर उठी यह आवाज फिलहाल यही पूछ रही है—

मुसाबनी के लोगों को इलाज के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा?

और गौरव क्रांति गुरु का ऐलान साफ है—

मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा, लेकिन रास्ता गांधी का ही होगा—अहिंसा का।

धरने में मदन मोहन सोरेन, वीरेंद्र नाथ घोष, मनोरंजन गिरी, विवेक गुप्ता, बाबू मोहाली, सागर मुखी, अनीता सागर, नताशा मुखी, शिव नायर, रवि घोष, खुदीराम हांसदा, भागुराम हांसदा सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन मोहम्मद गुलाम ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन गौरव क्रांति गुरु ने किया।