जमशेदपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), जमशेदपुर की मोबाइल वैन बुधवार को हुड़लुंग पंचायत भवन, मध्य विद्यालय बड़ाबांकी और आसपास की सबर बस्ती पहुंची। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष अरविंद कुमार पांडेय के निर्देश तथा डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी के मार्गदर्शन में आयोजित विधिक जागरूकता अभियान के दौरान ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को विभिन्न कानूनी प्रावधानों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्य अभिनव श्रीवास्तव तथा पीएलवी अरुण रजक, नागेन्द्र कुमार, जयंतो नंदी और जोबारानी बास्के मौजूद रहे। टीम ने ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों को डालसा के कार्य और उद्देश्य के साथ-साथ बाल विवाह, बाल श्रम, पॉक्सो एक्ट, मानव तस्करी, शिशु प्रोजेक्ट, डायन प्रथा, नशा उन्मूलन, नागरिकों के मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य, जनकल्याणकारी योजनाओं, प्राकृतिक आपदा और दुर्घटना बीमा सहित विभिन्न विषयों की जानकारी दी|

नल लगा है, लेकिन सबर बस्ती में आज भी पानी की धार का इंतजार.

किसी भी कानूनी अथवा अन्य समस्या के समाधान के लिए सिविल कोर्ट परिसर स्थित डालसा कार्यालय से संपर्क करने की अपील भी की गई।

जागरूकता शिविर में खुली सबर बस्ती की जमीनी हकीकत

विधिक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान जब डालसा टीम सबर बस्ती पहुंची तो वहां के लोगों ने अपनी रोजमर्रा की समस्याएं सीधे टीम के सामने रखीं। ग्रामीणों ने बताया कि बस्ती में नल तो लगा है, लेकिन उसमें पानी नहीं आता। पानी के अभाव में शौचालय भी उपयोगहीन हो चुके हैं। बस्ती में नाली, गली और पेयजल की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।

ग्रामीणों ने बताया कि रहने के लिए बनाए गए बिरसा आवासों की स्थिति भी बेहद खराब हो चुकी है। कई आवास खंडहर में तब्दील हो गए हैं और बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है। गंदगी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच लोग किसी तरह जीवन गुजारने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना था कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि बस्ती में पहुंचकर वोट मांगते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया जाता।

कागजी प्रक्रिया के अभाव में सरकारी योजनाओं से भी छूट रहे बच्चे

सबर परिवारों ने डालसा टीम को बताया कि शिक्षा और जागरूकता के अभाव में कई बच्चों और परिवारों के जन्म प्रमाण पत्र तथा मृत्यु प्रमाण पत्र तक नहीं बन पाते। इसका सीधा असर सरकारी योजनाओं के लाभ पर पड़ रहा है।

लगभग 16 वर्षीय छोटी सबर, माता-पिता के निधन के बाद सरकारी योजना के लाभ से वंचित.
सबीना सबर, पिता के निधन के बाद सरकारी योजना के लाभ से वंचित.

बस्ती की दो नाबालिग बच्चियों की स्थिति ने इस समस्या को और गंभीर रूप से सामने ला दिया। ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 16 वर्ष की छोटी सबर के माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि सबीना सबर के पिता का निधन हो गया है। कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण दोनों बच्चियां शिशु प्रोजेक्ट योजना के लाभ से वंचित हैं।

आर्थिक तंगी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण दोनों बच्चियों ने किसी तरह आठवीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी की, लेकिन इसके बाद उनकी पढ़ाई भी छूट गई।

डालसा टीम ने सुनी पूरी व्यथा, समस्या सचिव तक पहुंचाने का आश्वासन

सबर बस्ती के लोगों की समस्याओं को डालसा टीम ने गंभीरता से सुना। टीम ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी मूलभूत समस्याओं और योजनाओं से जुड़ी परेशानियों की जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, जमशेदपुर के सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी को दी जाएगी और समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल की जाएगी।

कानूनी जागरूकता के लिए पहुंची डालसा टीम के सामने सबर बस्ती की यह तस्वीर केवल कानून की जानकारी की जरूरत नहीं, बल्कि पानी, आवास, स्वच्छता, दस्तावेज और सरकारी योजनाओं तक पहुंच जैसी बुनियादी सुविधाओं की जमीनी चुनौती को भी सामने लाती है।