आद्रा। रेलवे परिसरों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी जिन हाथों पर है, उन हाथों की सेहत और सुरक्षा को लेकर भी संवेदनशीलता जरूरी है। इसी सोच के साथ दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा मंडल में चल रहे “स्वच्छता ही सेवा-2026” अभियान के तहत 30 सितंबर को ‘सफाई मित्र सुरक्षा सेवा एवं सम्मान शिविर’ के साथ व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया।

“स्वच्छता में सहभाग” थीम के तहत 17 सितंबर से 15 अक्टूबर तक चल रहे इस अभियान में सफाई व्यवस्था को केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि सफाई मित्रों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।

सफाई मित्रों के स्वास्थ्य की हुई जांच

आद्रा मंडल के डिविजनल रेलवे हॉस्पिटल, पुरुलिया तथा चांडिल स्वास्थ्य केंद्रों में सफाई मित्रों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए गए। शिविरों में सफाई मित्रों की स्वास्थ्य जांच के साथ आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श एवं स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन दिया गया।

सफाई कार्य के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचाव, सुरक्षा उपायों के पालन और अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने को लेकर भी सफाई मित्रों को जागरूक किया गया।

स्टेशन से प्लेटफॉर्म तक चला सफाई अभियान

इसी दिन आद्रा मंडल के विभिन्न स्टेशनों और रेलवे परिसरों में गहन स्वच्छता अभियान चलाया गया। स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म, यात्री सुविधाओं, कार्यालय परिसरों सहित रेलवे से जुड़े अन्य क्षेत्रों में व्यापक साफ-सफाई की गई।

कचरे के उचित निस्तारण और रेलवे परिसरों में स्वच्छ वातावरण बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। अभियान के दौरान यात्रियों और आम लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालने की अपील की गई।

सवाल सिर्फ सफाई का नहीं, सफाई करने वालों के सम्मान का भी

स्वच्छ रेलवे की तस्वीर तभी पूरी होगी, जब उसे साफ रखने वाले सफाई मित्रों की सेहत, सुरक्षा और सम्मान भी सुनिश्चित हो। आद्रा मंडल का यह अभियान इसी दिशा में एक पहल के रूप में सामने आया है।

“स्वच्छता ही सेवा-2026” के माध्यम से आद्रा मंडल ने एक ओर रेलवे परिसरों को स्वच्छ और सुरक्षित रखने का संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर सफाई व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सफाई मित्रों के स्वास्थ्य और कल्याण को भी प्राथमिकता देने का प्रयास किया है।

अब जरूरत इस बात की है कि स्वच्छता अभियान केवल निर्धारित तिथियों तक सीमित न रहे, बल्कि स्टेशन, प्लेटफॉर्म और रेलवे परिसर की रोजमर्रा की संस्कृति बने। इसमें रेलवे के साथ यात्रियों और आमजन की भागीदारी भी लगातार बनी रहनी चाहिए।