पत्नी-बेटी की पहली बरसी पर छलका पिता का दर्द, 40 सबर परिवारों के बीच बांटी खाद्य सामग्री और छाते

सोहदा गांव में भावुक कर देने वाला आयोजन, अपनों की याद में जरूरतमंदों की सेवा को बनाया श्रद्धांजलि का माध्यम

कुछ रिश्ते चले जाते हैं, लेकिन उनकी यादें जिंदगी भर साथ चलती हैं। शनिवार को बेनशोल पंचायत के सोहदा गांव स्थित विद्यालय परिसर में ऐसा ही एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जहां एक पति और पिता ने अपनी दिवंगत पत्नी और बेटी की पहली बरसी को आंसुओं में नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों की मदद करके याद किया।

महुलीशोल निवासी एन.जी. पटनायक ने अपनी दिवंगत पत्नी कुसुमिता पटनायक और बेटी मोनिका पटनायक की स्मृति में करीब 40 जरूरतमंद सबर परिवारों के बीच खाद्य सामग्री और छातों का वितरण किया।

दरअसल, 26 सितंबर 2025 को बहरागोड़ा क्षेत्र के आसपास हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में कुसुमिता पटनायक और उनकी बेटी मोनिका पटनायक की मौत हो गई थी। एक साल बाद एन.जी. पटनायक ने अपनी पीड़ा को समाजसेवा का रूप देकर दोनों की स्मृति को एक अलग अर्थ देने की कोशिश की।

बरसी पर श्रद्धांजलि, जरूरतमंदों के बीच मदद

सोहदा गांव में आयोजित कार्यक्रम में दिवंगत मां-बेटी को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद करीब 40 सबर परिवारों के बीच खाद्य सामग्री और छातों का वितरण किया गया। बरसात के बीच छाता और जरूरत की खाद्य सामग्री पाकर परिवारों के चेहरे पर राहत दिखाई दी।

दर्द निजी था, लेकिन संवेदना समाज के लिए

कार्यक्रम में बाबूलाल मुंडरी, सी.आर. प्रधान, संदीप दास, सिद्धार्थ मार्डी और बेनशोल की मुखिया सुकुरमनी हेम्ब्रम सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया।

सोहदा में हुआ यह आयोजन एक सवाल भी छोड़ गया—क्या अपनों की याद केवल आंसुओं और तस्वीरों तक सीमित रहनी चाहिए? एन.जी. पटनायक ने इसका जवाब अपने तरीके से दिया। उन्होंने अपने जीवन के सबसे बड़े दुख को जरूरतमंदों के चेहरे पर थोड़ी राहत लाने की कोशिश में बदल दिया।

किसी अपने को खोने का दर्द खत्म नहीं होता। लेकिन कभी-कभी उसी दर्द से निकली संवेदना किसी दूसरे के जीवन में थोड़ी राहत जरूर बन जाती है।