ट्रांसफर ऑर्डर के बाद भी मऊभंडार में जमे साकेत कुमार सिन्हा—आखिर इतने जरूरी क्यों?
25 जून को कॉरपोरेट ऑफिस का तबादला आदेश, 29 जून तक कार्यमुक्ति का स्पष्ट निर्देश; तीन महीने बाद भी मऊभंडार में मौजूदगी ने खड़े किए बड़े सवाल
मऊभंडार चौराहे पर मिली "खान साहब" की उपाधि—वसूली में भूमिका की चर्चाओं के बीच सवाल, आखिर तबादला आदेश के बावजूद क्यों नहीं छोड़ा गया मऊभंडार?
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के मऊभंडार यूनिट में साकेत कुमार सिन्हा का नाम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वजह कोई नया तबादला आदेश नहीं, बल्कि 25 जून 2026 का वह आदेश है, जिसमें उन्हें Corporate Office स्थानांतरित करते हुए 29 जून तक कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया गया था।
HCL कॉरपोरेट ऑफिस की ओर से जारी Office Order संख्या Estt./Transfers/2026-27 में श्री साकेत कुमार सिन्हा, Dy. Manager (HR), Employee Code-97105 को उनके वर्तमान Grade और Scale of Pay में Corporate Office स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया था। उन्हें आगे की जिम्मेदारी के लिए DGM (CC & Admn.) को रिपोर्ट करने का निर्देश भी दिया गया था।
आदेश में साफ लिखा था कि उन्हें वर्तमान कार्यस्थल से 29.06.2026 या उससे पहले कार्यमुक्त किया जाए।
फिर सवाल वही— जब आदेश हो गया था, तो साकेत कुमार सिन्हा अभी भी मऊभंडार में क्यों हैं?
मऊभंडार में क्यों मिली "खान साहब" की उपाधि?
गुरुवार को मऊभंडार चौराहे पर साकेत कुमार सिन्हा के तबादले को लेकर चर्चा के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें व्यंग्यात्मक अंदाज में "खान साहब" कहकर संबोधित किया।
यह उपाधि किसी सरकारी पद या कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है। यह स्थानीय लोगों की बातचीत में इस्तेमाल किया गया एक व्यंग्यात्मक संबोधन है। लेकिन इसके पीछे जो चर्चा सामने आई, वह जांच की मांग जरूर करती है।
स्थानीय लोगों के बीच यह आरोप/चर्चा सुनने को मिली कि कंपनी के अलग-अलग विभागों में भुगतान, बकाया और कथित वसूली से जुड़े मामलों में साकेत कुमार सिन्हा की भूमिका प्रभावशाली रहती है। कुछ लोगों का दावा था कि उनके चले जाने से कुछ लोगों की "परेशानी" बढ़ सकती है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जमीनी आवाज नहीं करता है। लेकिन सवाल यह है कि यदि ये सिर्फ चौराहे की अफवाहें हैं, तो कंपनी का स्पष्ट जवाब इन्हें खत्म कर सकता है।
क्या साकेत कुमार सिन्हा के पास भुगतान या वसूली से संबंधित ऐसी कोई आधिकारिक जिम्मेदारी है, जिसके कारण उनकी मौजूदगी को आवश्यक माना गया? HCL प्रबंधन को इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
विस्तारित अवधि का रहस्य
जमीनी आवाज के पास उपलब्ध दस्तावेजों में बाद की अवधि में 29.06.2026 से 29.09.2026 तक की विस्तारित अवधि का उल्लेख सामने आया है। यानी एक तरफ Corporate Office का स्थानांतरण आदेश और दूसरी तरफ उसी अधिकारी को मऊभंडार में बनाए रखने की प्रक्रिया।
क्या साकेत कुमार सिन्हा को रोकने के लिए कोई अलग सक्षम आदेश जारी हुआ था? अगर हुआ था तो किस कारण? और क्या उस आदेश में उनकी किसी विशेष प्रशासनिक भूमिका का उल्लेख है?
पांच सवाल—जिनका जवाब अब HCL को देना चाहिए
- 25 जून के आदेश में 29 जून तक कार्यमुक्त करने का निर्देश था। क्या साकेत कुमार सिन्हा को निर्धारित समय पर कार्यमुक्त किया गया था?
- अगर नहीं किया गया तो किस अधिकारी के आदेश पर उन्हें मऊभंडार में रोका गया?
- 29 जून से 29 सितंबर तक की विस्तारित अवधि का आधिकारिक आधार क्या था?
- मऊभंडार में उनके बारे में वसूली से जुड़ी जो चर्चाएं चल रही हैं, क्या कंपनी के पास ऐसी कोई शिकायत या जांच का रिकॉर्ड है?
- आखिर साकेत कुमार सिन्हा इतने जरूरी क्यों हैं कि Corporate Office के तबादला आदेश के बावजूद मऊभंडार में उनकी मौजूदगी बनी हुई है?
नौकरी और नियुक्ति को लेकर भी उठ रहे सवाल
मऊभंडार में उनकी नियुक्ति की परिस्थितियों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके पिता से जुड़े एक कथित पुराने मामले और उसके बाद नौकरी मिलने की परिस्थितियों पर सवाल उठा रहे हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि जिस समय साकेत कुमार सिन्हा को HCL में नौकरी मिली, उस दौरान वे घाटशिला कॉलेज में अध्ययनरत थे।
जमीनी आवाज इन दावों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। लेकिन यदि नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक दस्तावेज, शिकायत या रिकॉर्ड उपलब्ध है, तो इसकी निष्पक्ष जांच की जा सकती है। क्योंकि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना पत्रकारिता का उद्देश्य नहीं है।
"खान साहब" की चर्चा से बड़ा है असली सवाल
मऊभंडार के चौराहे पर किसी अधिकारी को "खान साहब" कह दिया जाना अपने आप में कोई प्रमाण नहीं है। लेकिन जब उसी अधिकारी के नाम से तबादले का स्पष्ट कॉरपोरेट आदेश मौजूद हो, कार्यमुक्ति की तारीख तय हो और उसके बावजूद उनकी मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हों, तब जनता का यह पूछना स्वाभाविक है—
क्या किसी अधिकारी की उपयोगिता इतनी महत्वपूर्ण हो सकती है कि Corporate Office का आदेश भी उसके सामने कमजोर पड़ जाए?
यह सवाल अब सिर्फ मऊभंडार चौराहे का नहीं रहा। यह HCL की प्रशासनिक पारदर्शिता का सवाल बन चुका है। जमीनी आवाज के पास उपलब्ध दस्तावेज सवाल पूछ रहे हैं। अब जवाब HCL प्रबंधन को देना है।
कागज पर तबादला हो चुका था—क्या जमीन पर भी तबादला हुआ?





