रामायण के रचयिता के व्यक्तित्व और कृतित्व पर शिक्षकों ने डाला प्रकाश, सत्य, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा के आदर्श अपनाने का दिया संदेश
जमीनी आवाज | विशेष रिपोर्ट
मुसाबनी | असित भट्टाचार्य की कलम से
मुसाबनी। जीसीजेडी उच्च विद्यालय के सभागार में महर्षि वाल्मीकि जयंती श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं ने रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि के जीवन, व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, साहित्य और नैतिक जीवन मूल्यों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के दौरान महर्षि वाल्मीकि के जीवनवृत्त, उनकी साधना और भारतीय साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि महर्षि वाल्मीकि का नाम भारतीय साहित्यिक परंपरा में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी रचना रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि जीवन में सत्य, धर्म, त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा के महत्व को समझाने वाला प्रेरणास्रोत भी है।

आदिकवि की रचनाएं आज भी समाज को दिखाती हैं सही मार्ग
विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुरारी प्रसाद सिंह ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन और साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे संस्कृत साहित्य के महान कवि और आदिकवि के रूप में विख्यात हैं। उनके द्वारा रचित रामायण भारतीय संस्कृति, नैतिकता और आदर्श जीवन मूल्यों का महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रचनाओं में निहित संदेश आज भी प्रासंगिक हैं। रामायण में वर्णित आदर्श मनुष्य को सत्य के मार्ग पर चलने, अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने और जीवन में मर्यादा बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। विद्यार्थियों के लिए इन आदर्शों का विशेष महत्व है, क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार, संवेदनशील और चरित्रवान नागरिक बनना भी है।
शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण पर भी दें ध्यान : शिवपूजन सिंह चौहान
इंटर कॉलेज के प्राचार्य शिवपूजन सिंह चौहान ने अपने संबोधन में महर्षि वाल्मीकि के जीवन को परिवर्तन, साधना और ज्ञान की महत्ता का प्रेरक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर प्रयास और ज्ञान के प्रति समर्पण से व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण पर भी विशेष ध्यान दें। उन्होंने नैतिक मूल्यों, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को विद्यार्थी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि अच्छे संस्कार और सकारात्मक सोच ही व्यक्ति को जीवन में सही दिशा प्रदान करते हैं।
शिक्षकों ने रामायण के सांस्कृतिक महत्व से कराया परिचित
इस अवसर पर शिक्षक विनोद कुमार लाल, कृष्ण कुमार, वासुदेव गिरी और किरण कुमारी ने भी महर्षि वाल्मीकि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने रामायण की रचना, उसके सांस्कृतिक महत्व और उसमें वर्णित जीवन मूल्यों की चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को भारतीय साहित्य एवं परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
शिक्षकों ने कहा कि रामायण में वर्णित सत्य, त्याग, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श आचरण जैसे मूल्य आज भी समाज के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इन मूल्यों को अपनाकर विद्यार्थी न केवल अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को महर्षि वाल्मीकि के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। शिक्षकों ने उन्हें प्रेरित किया कि वे महापुरुषों के जीवन से सीख लें और उन आदर्शों को अपने व्यवहार एवं दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।
आयोजन में शिक्षकों का रहा महत्वपूर्ण योगदान
महर्षि वाल्मीकि जयंती के सफल आयोजन में शिक्षक निमाई मार्डी, विष्णु पातर, राज मार्डी और राहुल लामा सहित अन्य शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महर्षि वाल्मीकि के जीवन और साहित्यिक विरासत से परिचित कराने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना रहा।
इस आयोजन ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि महापुरुषों की जयंती मनाने का वास्तविक उद्देश्य केवल उन्हें याद करना नहीं, बल्कि उनके विचारों, आदर्शों और शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाना भी है। महर्षि वाल्मीकि की साहित्यिक विरासत आज भी नई पीढ़ी को ज्ञान, सदाचार और आदर्श जीवन की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।