नई दिल्ली, 31 अक्टूबर।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन की प्रतीकात्मक जन महाभियोग कार्यवाही के बीच भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों को भ्रामक बताया और निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया का बचाव किया।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्ष के 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि इस आंकड़े में ऐसे मतदाता भी शामिल हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो दूसरी जगह स्थानांतरित हो गए हैं या जिनकी प्रविष्टियां डुप्लीकेट हैं।
संबित पात्रा के अनुसार, मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाना है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह SIR की प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच गलतफहमी पैदा कर रहा है।
भाजपा ने यह भी कहा कि जिन योग्य नागरिकों का नाम मतदाता सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, विपक्ष का सवाल है कि इस प्रक्रिया के दौरान किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने की स्थिति में उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा।
INDIA गठबंधन के कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। भाजपा की ओर से कटाक्ष किया गया कि राहुल गांधी अब अपनी पसंद की संसद में बैठ रहे हैं, जबकि वास्तविक चुनावी राजनीति में जीत हासिल करने में असमर्थ हैं। इस बयान के माध्यम से भाजपा ने विपक्ष के कार्यक्रम को राजनीतिक प्रदर्शन करार देने की कोशिश की।
दूसरी ओर, INDIA गठबंधन का कहना है कि उसका उद्देश्य निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और मतदाता अधिकारों की रक्षा से जुड़े सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाना है।
इस पूरे राजनीतिक टकराव में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। विपक्ष का आरोप है कि SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण आवश्यक प्रक्रिया है और विपक्ष आंकड़ों को गलत संदर्भ में पेश कर रहा है।
ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है कि निर्वाचन आयोग संबंधित आंकड़ों, नाम हटाए जाने के कारणों और प्रभावित मतदाताओं के लिए उपलब्ध सुधार प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करे।
जमीनी आवाज इस पूरे विवाद के बीच पांच सीधे सवाल सामने रखता है—
1. 13.2 करोड़ नामों के आंकड़े में मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की वास्तविक संख्या कितनी है?
2. क्या निर्वाचन आयोग राज्यवार और श्रेणीवार आंकड़े सार्वजनिक करेगा?
3. यदि किसी योग्य मतदाता का नाम गलती से हट गया है, तो उसे कितने समय में राहत मिलेगी?
4. क्या भाजपा और विपक्ष दोनों इस विषय पर राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर दस्तावेजों के आधार पर चर्चा करेंगे?
5. क्या निर्वाचन आयोग स्वतंत्र रूप से इन विवादों का तथ्यात्मक जवाब देगा?
लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। विपक्ष को सवाल उठाने का अधिकार है, तो सरकार और उससे जुड़े राजनीतिक दलों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
लेकिन अंततः इस विवाद का समाधान राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि पारदर्शी आंकड़ों, निष्पक्ष जांच और मतदाता के अधिकारों की सुरक्षा से ही संभव है। किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। साथ ही मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाकर सूची को शुद्ध रखना भी जरूरी है।
जमीनी आवाज का सवाल है—राजनीतिक दलों की इस लड़ाई में आम मतदाता का भरोसा कौन बचाएगा?
खबरें जमीन की, जमाने की।असित भट्टाचार्य
संस्थापक एवं प्रधान संपादक...जमीनी आवाज