जमीनी आवाज | विशेष राजनीतिक रिपोर्ट

नई दिल्ली।

देश की चुनावी व्यवस्था, मतदाता अधिकारों और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने 31 अक्टूबर को नई दिल्ली में एक अनोखा राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम को गठबंधन ने 'जन महाभियोग' नाम दिया। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक सार्वजनिक कार्यवाही की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कार्यवाही की शुरुआत की, जबकि कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता इसमें शामिल हुए। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी भी इस आयोजन की राजनीतिक अहमियत को दर्शाती रही।

मतदाता सूची और SIR बना विरोध का प्रमुख मुद्दा

इस कार्यक्रम के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाताओं के नाम कथित रूप से हटाए जाने से जुड़े सवाल रहे। विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जवाबदेही पर सवाल उठाए।

कार्यक्रम में उन नागरिकों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया गया, जिनका दावा है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। विपक्ष का कहना है कि मताधिकार से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रतीकात्मक कार्यवाही में विपक्षी नेताओं के साथ नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी रही।

संसद के बाहर क्यों करनी पड़ी ऐसी कार्यवाही?

विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ संसद में महाभियोग संबंधी उनके नोटिस स्वीकार नहीं किए गए। इसी के बाद उन्होंने संसद के बाहर सार्वजनिक मंच पर इस तरह की प्रतीकात्मक कार्यवाही आयोजित करने का निर्णय लिया।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर सहित विपक्ष के नेताओं ने इस कदम को संसद में अपनी बात रखने के अवसर से जुड़ा सवाल बताया। हालांकि, यह स्पष्ट रहना जरूरी है कि खड़गे के आवास पर आयोजित यह कार्यक्रम संवैधानिक महाभियोग की वास्तविक प्रक्रिया नहीं था और इससे मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में जुटेगा विपक्ष

इस आयोजन को विपक्ष की व्यापक राजनीतिक मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है। 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी है।

अब देखने वाली बात होगी कि विपक्ष द्वारा उठाए गए मतदाता अधिकारों और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर सरकार तथा निर्वाचन आयोग की ओर से क्या जवाब सामने आता है।

जमीनी आवाज का सवाल

लोकतंत्र में चुनाव केवल सरकार बनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के मताधिकार और भरोसे से जुड़ी व्यवस्था है। यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हटता है, तो उसे कारण जानने और नियमानुसार सुधार कराने का प्रभावी अवसर मिलना चाहिए।

सवाल केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का नहीं है। असली सवाल यह है कि देश के प्रत्येक योग्य मतदाता का मतदान का अधिकार सुरक्षित कैसे रहे और निर्वाचन प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहे?

जमीनी आवाज की नजर अब 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली और उसके बाद सामने आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी।

खबरें जमीन की, जमाने की।असित भट्टाचार्य

संस्थापक एवं प्रधान संपादक...जमीनी आवाज