जमीनी आवाज | विशेष रिपोर्ट

मुसाबनी। असित भट्टाचार्य की कलम से

दीपावली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं, बल्कि अपने भीतर ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक बदलाव का प्रकाश जगाने का भी अवसर है। इसी सोच को सार्थक रूप देते हुए जीसीजेडी हाई स्कूल, मुसाबनी में आयोजित दीपावली सेलिब्रेशन कार्यक्रम ने उत्सव को जागरूकता, व्यक्तित्व विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के एक खूबसूरत मंच में बदल दिया। धनतेरस के शुभ अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को मनोरंजन के साथ जीवन में आगे बढ़ने की ऐसी सीख मिली, जो उनके भविष्य को मजबूत बनाने में सहायक हो सकती है।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सामाजिक संस्था ग्रोथ की सचिव दर्शना सिंह का प्रेरक संबोधन रहा। उन्होंने बच्चों के सामने पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और पारिवारिक संवाद जैसे विषयों को बेहद सहज और प्रभावशाली तरीके से रखा। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था जंगलों में प्राकृतिक रूप से गिरे बीजों को एकत्रित कर ऐसे स्थानों पर रोपित करती है, जहां मिट्टी का कटाव होता है। समय के साथ यही बीज पेड़ बनकर हरियाली बढ़ाते हैं और प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में योगदान देते हैं।

दर्शना सिंह ने बच्चों को समझाया कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति अपने छोटे-छोटे प्रयासों से प्रकृति को बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उनका संदेश था कि आज का छोटा प्रयास ही कल के सुरक्षित पर्यावरण की नींव बनता है।

उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पारिवारिक संवाद को भी बेहद जरूरी बताया। उनके अनुसार माता-पिता और बच्चों के बीच खुलकर बातचीत होनी चाहिए। जब बच्चे अपनी बात बिना किसी संकोच के परिवार के सामने रख पाते हैं, तो उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है और समस्याओं का समाधान निकालने की क्षमता विकसित होती है।

उन्होंने 'चुप्पी तोड़ो' अभियान की जानकारी देते हुए विद्यालय के बच्चों के अलग-अलग समूह बनाकर आने वाले दिनों में इस दिशा में काम करने की बात कही। यह पहल बच्चों को अपनी बात रखने, दूसरों की समस्याओं को समझने और सामाजिक विषयों पर जागरूक होने का अवसर दे सकती है। उनके संबोधन ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाना नहीं, बल्कि बच्चों को संवेदनशील, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।

कार्यक्रम के संचालन और अतिथियों के अभिनंदन में इंटर कॉलेज के प्राचार्य शिवपूजन सिंह चौहान की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। अपने सहज, मिलनसार और बच्चों के बीच आत्मीय जुड़ाव रखने वाले शिक्षक के रूप में उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को पारिवारिक वातावरण प्रदान किया। उनके स्वागत भाषण और अतिथियों के सम्मान ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। विद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुरारी प्रसाद सिंह की शैक्षणिक सोच भी इस आयोजन के माध्यम से सामने आई। उनकी कोशिश है कि विद्यालय में समय-समय पर ऐसे छोटे-छोटे कार्यक्रम आयोजित हों, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के अतिरिक्त व्यावहारिक जीवन, सामाजिक सरोकार, संस्कार और व्यक्तित्व विकास की शिक्षा मिल सके।

विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर उन्हें समाज और प्रकृति से जोड़ने का उनका प्रयास विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों को नया आयाम देता है। युवा पीढ़ी के बीच उनकी स्वीकार्यता और बच्चों के भविष्य को लेकर उनकी सक्रियता विद्यालय के सकारात्मक वातावरण को मजबूत करती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पोटका के समाजसेवी वीरेंद्र सिंह ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में टीटू सिंह उपस्थित थे। प्रधानाध्यापक मुरारी प्रसाद सिंह ने विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, परीक्षा परिणाम और उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों से सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल दीपावली मनाने की अपील की गई। मौके पर शिक्षक सोमेश्वर झा, विनोद कुमार लाल, कृष्ण कुमार, किरण कुमारी, निमाई मार्डी, अल्पना सिंह, विष्णु पातर, वासुदेव गिरी, राहुल लामा, रणधीर कुमार सिंह, समीर राणा सहित विद्यालय के शिक्षक एवं अन्य लोग उपस्थित थे।

संदेश साफ है—जब विद्यालय में उत्सव के साथ संस्कार, शिक्षा के साथ कौशल और दीपों के साथ जागरूकता का प्रकाश भी जलता है, तभी शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है। जीसीजेडी हाई स्कूल का यह आयोजन इसी सकारात्मक सोच की एक सुंदर मिसाल बनकर सामने आया।

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