CHC नीमडीह में गर्भवती महिला की खून जांच के नाम पर 500 रुपये लेने का आरोप, लैब टेक्नीशियन पर गंभीर सवाल

पति ने नीमडीह थाना में दी लिखित शिकायत, डराने-धमकाने का भी आरोप; गरीब किसान परिवार से होने की बात कहते हुए कार्रवाई की मांग

सरायकेला : विजय कुमार गोप की रिपोर्ट

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को इलाज एवं जांच की सुविधा उपलब्ध कराना है। लेकिन सरायकेला-खरसावां जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) नीमडीह से सामने आई एक शिकायत ने सरकारी अस्पतालों में जांच व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गर्भवती महिला की रक्त जांच के एवज में 500 रुपये लेने का आरोप CHC में तैनात लैब टेक्नीशियन पर लगाया गया है। मामले को लेकर बाइदा गांव निवासी सिमन्त सिंह ने नीमडीह थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार घटना 24 जून 2026 की है। सिमन्त सिंह अपनी गर्भवती पत्नी नूनी बाला सिंह को रक्त जांच कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नीमडीह लेकर पहुंचे थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वहां पदस्थापित लैब टेक्नीशियन सुनील कुमार राम ने रक्त जांच के बदले उनसे 500 रुपये लिए।

जांच के नाम पर रुपये लेने और डराने-धमकाने का आरोप

सिमन्त सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह गरीब किसान परिवार से आते हैं और उनके लिए 500 रुपये भी छोटी रकम नहीं है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद रक्त जांच के लिए उनसे रुपये लिए गए।

शिकायत में लैब टेक्नीशियन पर उनकी गर्भवती पत्नी को डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जांच नहीं कराने पर गर्भावस्था को लेकर गंभीर परिणाम की बात कहकर उनकी पत्नी को भयभीत किया गया।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है

सवाल यह भी है कि यदि रक्त जांच सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था के तहत उपलब्ध थी, तो उसके लिए कथित रूप से रुपये क्यों लिए गए? और यदि किसी जांच के लिए निर्धारित शुल्क था, तो क्या उसकी बाकायदा रसीद दी गई थी?

घटना जून की, वर्तमान CCTV व्यवस्था बाद में लागू हुई

मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि CHC नीमडीह को सितंबर 2026 के अंत में नए BPHU भवन में स्थानांतरित किया गया है। चिकित्सा पदाधिकारी के अनुसार नए भवन में CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं।

हालांकि शिकायत में जिस घटना का उल्लेख किया गया है, वह 24 जून 2026 की है। यानी यह घटना वर्तमान CCTV व्यवस्था लागू होने से पहले की बताई गई है। ऐसे में मामले की जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, शिकायत, अस्पताल के रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

गरीब मरीजों से कथित वसूली का आरोप बना बड़ा सवाल

सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इलाज और जांच के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि किसी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच या इलाज के नाम पर अवैध रूप से पैसे लेने की शिकायत सामने आती है, तो मामला केवल 500 रुपये तक सीमित नहीं रहता। यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और गरीब मरीजों के भरोसे से जुड़ा सवाल बन जाता है।

सिमन्त सिंह ने नीमडीह थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देकर मामले में शीघ्र संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई की मांग की है।

जमीनी आवाज का सवाल—जांच से ही सामने आएगी सच्चाई

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात निष्पक्ष जांच है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप गलत हैं तो जांच के जरिए सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

जमीनी आवाज इस मामले में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर नजर बनाए रखेगा।