दशहरा से पहले प्रशासन की तैयारी, सफाई शुल्क पर पूजा समितियों का सवाल

आदित्यपुर में शांति समिति की बैठक में बिजली-पानी से लेकर सुरक्षा तक पर चर्चा, नगर निगम के सफाई और जेसीबी शुल्क को लेकर नाराजगी

सरायकेला : विजय कुमार गोप की रिपोर्ट

दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शहर और समाज को जोड़ने वाला ऐसा अवसर है, जहां आस्था के साथ व्यवस्था की भी परीक्षा होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए आदित्यपुर थाना परिसर में आगामी दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और भाईचारे के माहौल में संपन्न कराने को लेकर शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी तैयारियां सामने रखीं, वहीं पूजा समितियों की ओर से नगर निगम द्वारा लगाए जा रहे सफाई एवं जेसीबी शुल्क का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।

आदित्यपुर थाना परिसर में दशहरा को लेकर आयोजित शांति समिति की बैठक में मौजूद प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और पूजा समिति के सदस्य

थाना प्रभारी अंजनी कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में बिजली, पानी, सड़क, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक का माहौल उस समय गरमा गया, जब पूजा समितियों की ओर से नगर निगम के सफाई शुल्क को लेकर नाराजगी जाहिर की गई।

पूजा समितियों का कहना था कि दुर्गापूजा का आयोजन पहले से ही सीमित संसाधनों और लोगों से जुटाए गए चंदे के सहारे किया जाता है। ऐसे में आयोजन से जुड़े अतिरिक्त शुल्क का बोझ समितियों के लिए आर्थिक परेशानी बढ़ाने वाला है।

शुल्क निर्धारण पर जनप्रतिनिधियों ने भी उठाए सवाल

नगर निगम के इस फैसले को लेकर महापौर संजय सरदार ने कहा कि विरोध होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस शुल्क के संबंध में पूर्व में जानकारी नहीं थी। महापौर ने आश्वासन दिया कि मामले को लेकर बैठक की जाएगी और जल्द सकारात्मक समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।

वहीं डिप्टी मेयर सह प्रवीण सेवा संस्थान के अध्यक्ष अंकुर सिंह ने शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि बिना बोर्ड बैठक या पर्याप्त चर्चा के पूजा समितियों पर शुल्क तय किया गया है, तो इस पर पुनर्विचार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पूजा समितियां पहले से ही लोगों से चंदा जुटाकर आयोजन करती हैं। ऐसे में अतिरिक्त आर्थिक बोझ उनकी मुश्किलें बढ़ा सकता है। उनके अनुसार सभी पार्षद इस मुद्दे के विरोध में हैं और शुल्क को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।

सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासन का भरोसा, संवेदनशील इलाकों पर रहेगी नजर

गम्हरिया के प्रभारी बीडीओ श्रवण कुमार झा ने बैठक में भरोसा दिलाया कि जनता और पूजा समितियों की ओर से उठाई गई समस्याओं का प्रशासनिक स्तर पर हर संभव निराकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यही है कि पूर्व वर्षों की तरह इस बार भी दशहरा शांतिपूर्ण और उल्लासपूर्ण माहौल में संपन्न हो।

सरायकेला के एसडीपीओ अभिनव भारद्वाज ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चोरी और आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। पूजा समितियों के स्वयंसेवकों को भी सुरक्षा व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत वायरलेस के माध्यम से त्वरित निगरानी, वॉच टावर और सीसीटीवी कैमरों के जरिए संवेदनशील इलाकों पर नजर रखने की बात कही गई। प्रशासन का फोकस भीड़ नियंत्रण के साथ-साथ पूजा पंडालों और आसपास के क्षेत्रों में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने पर रहेगा।

सवाल सिर्फ शुल्क का नहीं, व्यवस्था की जिम्मेदारी का भी

शांति समिति की बैठक ने एक महत्वपूर्ण सवाल सामने रखा है—दशहरा जैसे सामुदायिक पर्व में व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन, नगर निगम और पूजा समितियों के बीच किस तरह संतुलित होगी?

एक तरफ प्रशासन शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की तैयारी का भरोसा दे रहा है, तो दूसरी तरफ पूजा समितियां आयोजन के अतिरिक्त खर्च को लेकर अपनी चिंता सामने रख रही हैं।

अब निगाहें उस बैठक और समाधान पर टिकी हैं, जिसमें नगर निगम के सफाई एवं जेसीबी शुल्क को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाना है।

दशहरा का उत्सव तभी पूरी तरह सफल माना जाएगा, जब पंडालों में आस्था की रोशनी के साथ शहर की व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत दिखाई दे। ऐसे में व्यवस्था की जिम्मेदारी और उसका आर्थिक बोझ किस पर कितना पड़ेगा, यह सवाल भी अब चर्चा के केंद्र में है।