ग्राम प्रधान मधुसूदन गोप का दावा—मुश्किल वक्त में मदद मांगने पर कथित तौर पर कहा गया, ‘अपनी औकात के हिसाब से गाड़ी भाड़े पर ले जाइए’; पुराने झामुमो कार्यकर्ता ने जताई नाराजगी
सरायकेला : विजय कुमार गोप की रिपोर्ट
नीमडीह प्रखंड के जुगिलोंग गांव में सड़क हादसे में तीन युवकों की मौत के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने के दौरान एंबुलेंस को लेकर पैदा हुआ विवाद अब राजनीतिक और संगठनात्मक चर्चा का विषय बन गया है। मामले में ईचागढ़ विधायक सविता महतो के निजी सहायक एवं झामुमो के केंद्रीय सदस्य कबलू महतो उर्फ राजीव महतो पर ग्राम प्रधान के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगा है।
घटना के बाद स्थानीय झामुमो कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों में नाराजगी की बात सामने आ रही है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और कबलू महतो का पक्ष सामने आना बाकी है।
तीन युवकों की मौत, पोस्टमार्टम के लिए शव ले जाने के दौरान विवाद
ग्राम प्रधान मधुसूदन गोप के अनुसार सोमवार रात जुगिलोंग गांव में हुए सड़क हादसे में उनके तीन भतीजों स्वपन गोप, शिवराम गोप और लुकेश गोप की मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार और ग्रामीणों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
मंगलवार को तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए बलरामपुर से पुरुलिया सदर अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी दौरान शवों को ले जाने वाली एंबुलेंस के कागजात और वाहन नंबर को लेकर रास्ते में पुलिस स्तर पर जानकारी मांगी गई। इसी क्रम में एंबुलेंस को लेकर विवाद की स्थिति पैदा होने का दावा किया गया है।
प्रखंड अध्यक्ष से संपर्क नहीं हुआ तो विधायक के PA को किया फोन
मधुसूदन गोप के अनुसार गांव के मनोरंजन सिंह ने झामुमो प्रखंड अध्यक्ष सचिन गोप के माध्यम से एंबुलेंस की व्यवस्था कराई थी।
रास्ते में बलरामपुर पुलिस द्वारा एंबुलेंस के कागजात और वाहन नंबर पूछे जाने पर उन्होंने पहले सचिन गोप से संपर्क करने का प्रयास किया। उनके अनुसार तत्काल संपर्क नहीं हो पाने के बाद उन्होंने ईचागढ़ विधायक के निजी सहायक कबलू महतो को फोन किया और एंबुलेंस का नंबर एवं आवश्यक जानकारी मांगी।
मधुसूदन गोप का आरोप है कि बातचीत के दौरान कबलू महतो ने एंबुलेंस का नंबर देने से इनकार किया और कथित तौर पर कहा कि अपनी गाड़ी भाड़े पर लेकर जाइए, यह गाड़ी पोस्टमार्टम के लिए नहीं है।
ग्राम प्रधान का यह भी आरोप है कि बातचीत के दौरान उनके साथ ‘औकात’ को लेकर टिप्पणी की गई। हालांकि इस बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
‘निर्मल महतो के समय से पार्टी को खून-पसीने से सींचा है’
घटना से आहत मधुसूदन गोप ने कहा कि उनका परिवार और क्षेत्र के कई पुराने कार्यकर्ता लंबे समय से झामुमो से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने निर्मल महतो के दौर से पार्टी को खून-पसीने से सींचा है और पूर्व मंत्री सुधीर महतो की गाड़ी तक चलाई है। ऐसे में तीन युवकों की मौत जैसे दुखद समय में जिस तरह के व्यवहार का वह आरोप लगा रहे हैं, उससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी ठेस पहुंची है।
उनका कहना है कि राजनीतिक संगठन में वर्षों से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ कठिन समय में सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए, खासकर तब जब परिवार के तीन सदस्य एक हादसे में जान गंवा चुके हों।
एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर भी उठे सवाल
विवाद के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जरूरत के समय उपलब्ध कराई गई एंबुलेंस की व्यवस्था और उसके इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट समन्वय क्यों नहीं हो सका।
ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि ईचागढ़ क्षेत्र में समाजसेवी हरेलाल महतो की ओर से संचालित एंबुलेंस सेवा जरूरतमंदों तक पहुंचती रही है। ऐसे में आपात स्थिति में एंबुलेंस से संबंधित जानकारी मांगने पर कथित रूप से अपमानजनक व्यवहार का आरोप गंभीर सवाल खड़े करता है
हालांकि एंबुलेंस की व्यवस्था किस स्तर पर हुई थी, वाहन किसके नियंत्रण में था और पोस्टमार्टम के लिए उसे ले जाने की अनुमति या प्रक्रिया क्या थी—इन सभी बिंदुओं की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
विधायक से मामले में संज्ञान लेने की मांग
घटना के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं ने ईचागढ़ विधायक सविता महतो से मामले में संज्ञान लेने की मांग की है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी राजनीतिक संगठन की ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता होते हैं और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार संगठन की जिम्मेदारी है। ऐसे में पूरे मामले की जानकारी लेकर उचित स्तर पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
वहीं, मामले में कबलू महतो का पक्ष सामने आना भी जरूरी है। उनसे लगाए गए आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
जमीनी आवाज का सवाल—मुश्किल वक्त में मदद और सम्मान दोनों क्यों नहीं?
तीन युवकों की मौत से पूरा गांव शोक में था। ऐसे संवेदनशील समय में एंबुलेंस जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर विवाद सामने आना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि एंबुलेंस किसकी थी और उसे किस उद्देश्य से उपलब्ध कराया गया था। बड़ा सवाल यह भी है कि मुश्किल वक्त में मदद मांगने पहुंचे ग्रामीण को व्यवस्था और सम्मान—दोनों क्यों नहीं मिल सके?
फिलहाल यह मामला आरोप और दावों के स्तर पर है। एंबुलेंस की व्यवस्था, बातचीत और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच तथा दोनों पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
जमीनी आवाज इस मामले में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर बनाए रखेगा।