गंधानिया/घाटशिला। दूर-दराज के गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। काड़ाइबुरू/गंधानिया स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों का धरना इसी चिंता का एक प्रत्यक्ष रूप बनकर सामने आया।

धरने में आजसू नेता एवं चार बार विधानसभा प्रत्याशी रहे कानू सामंत भी शामिल हुए। उन्होंने ग्रामीणों की मांगों के समर्थन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में 24 घंटे डॉक्टर की उपलब्धता, प्रसव की समुचित व्यवस्था, बिजली, सांप एवं कुत्ते के काटने पर आवश्यक दवाओं की उपलब्धता तथा जन्म प्रमाण पत्र से संबंधित सुविधा शामिल रही।

खास बात यह रही कि धरना केवल विरोध तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीणों की ओर से उठाई गई मांगों पर संबंधित स्तर से सकारात्मक आश्वासन और सहमति बनने की बात सामने आई है। अब ग्रामीणों की उम्मीद है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति में बदलाव दिखाई देगा।

चार दिन पहले उठी थी बात, आज दिखी जमीन पर पहल

इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू भी सामने आता है। धरने से करीब चार दिन पहले कांग्रेस के युवा नेता एवं जिला महासचिव शिवाजी चटर्जी ने जमीनी आवाज के संवाददाता से बातचीत के दौरान दूर-दराज के गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसी संस्थाओं को बेहतर बनाने की जरूरत पर गंभीर चर्चा की थी। उनका कहना था कि ग्रामीण इलाकों में इन सुविधाओं की कमी के कारण लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है और इस दिशा में जल्द पहल होनी चाहिए।

चार दिन बाद इसी तरह के मुद्दे को लेकर गंधानिया में ग्रामीणों का धरना सामने आया और वरिष्ठ नेता कानू सामंत ने उसमें भाग लेकर ग्रामीणों की मांगों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इसे केवल एक राजनीतिक घटना के रूप में देखने के बजाय जनसरोकार के मुद्दे पर अलग-अलग पीढ़ियों की चिंता के एक बिंदु पर आने के रूप में भी देखा जा सकता है। युवा नेतृत्व जिन बुनियादी सवालों को आगे बढ़ाने की जरूरत महसूस कर रहा है, वरिष्ठ नेतृत्व की ओर से उन्हीं सवालों को धरातल पर उठाने की पहल दिखाई दी है।

मुद्दा राजनीति से बड़ा—गांव में इलाज की सुविधा

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा का सवाल सीधे आम परिवार की जिंदगी से जुड़ा है। डॉक्टर की अनुपलब्धता, प्रसव सुविधा का अभाव, बिजली की समस्या अथवा आपात स्थिति में जरूरी दवाओं की कमी गरीब और दूर-दराज के परिवारों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है।

ऐसे में गंधानिया का धरना यह सवाल सामने रखता है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र केवल भवन और बोर्ड तक सीमित न रहें, बल्कि वहां आवश्यक सेवाएं भी नियमित रूप से उपलब्ध हों।

कानू सामंत का धरने में शामिल होना जहां इस मांग को सार्वजनिक रूप से समर्थन देने की पहल के रूप में सामने आया, वहीं कुछ दिन पहले शिवाजी चटर्जी द्वारा इसी समस्या पर चिंता व्यक्त किया जाना यह दिखाता है कि ग्रामीण स्वास्थ्य जैसे मुद्दे अब युवा और वरिष्ठ—दोनों पीढ़ियों के सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन रहे हैं।

अब असली सवाल—आश्वासन कब बनेगा व्यवस्था?

धरना समाप्त हो गया, मांगों पर सहमति की बात भी सामने आ गई, लेकिन ग्रामीणों के लिए कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।

अब उनकी नजर इस बात पर होगी कि 24 घंटे डॉक्टर, प्रसव सुविधा, बिजली, आवश्यक दवाएं और जन्म प्रमाण पत्र जैसी सुविधाएं कब तक वास्तव में उपलब्ध होती हैं।

जमीनी आवाज की नजर में इस पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात यही है—ग्रामीणों ने आवाज उठाई, नेताओं ने उस आवाज के साथ खड़े होने की पहल की, लेकिन अंतिम सफलता तभी मानी जाएगी जब आयुष्मान आरोग्य मंदिर की व्यवस्था धरातल पर बदले और ग्रामीणों को अपने गांव में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले।