जल-जमाव और बदहाल जल निकासी पर प्रशासन का ध्यानाकर्षण

घाटशिला के नागरिक जीवन की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन चुकी जल-जमाव और बदहाल जल निकासी व्यवस्था को लेकर अब लिखित रूप से प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया है। सामाजिक पहल “सक्रिय संवेदना” ने अनुमंडल पदाधिकारी, घाटशिला को पत्र देकर शहर की नालियों की स्थिति, जल-जमाव और सफाई व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई है।

पत्र में कहा गया है कि घाटशिला शहरी क्षेत्र में जल निकासी के लिए कई जगह नालियां तो हैं, लेकिन अधिकांश आधी-अधूरी, जर्जर अथवा बढ़ती आबादी के लिहाज से अपर्याप्त हैं। कई स्थानों पर नालियां जल निकासी के बजाय घरों और दुकानों से निकलने वाले सूखे-गीले कचरे के जमाव का स्थान बन गई हैं। नियमित और स्थायी सफाई व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थिति और गंभीर होती जा रही है।

पुराना शहर, लेकिन जल निकासी की समस्या आज भी कायम

प्रो. मित्रेश्वर के अनुसार घाटशिला एक पुराना शहर है। बाजार क्षेत्र में पहले से मौजूद नालियों का एक समय में अनुमंडल पदाधिकारी रहे हरि नारायण राम के कार्यकाल में जीर्णोद्धार किया गया था तथा कुछ स्थानों पर नालियों का नवीकरण भी हुआ। हालांकि पूरे शहर के लिए एक सुनियोजित और समग्र जल निकासी व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी।

सक्रिय संवेदना ने यह सवाल भी उठाया है कि शहर में नालियों की सफाई, मरम्मत और रखरखाव के लिए स्थायी रूप से जवाबदेह व्यवस्था आखिर किस स्तर पर है। पत्र में नगर पंचायत के अभाव और ग्राम पंचायतों की सीमित वित्तीय क्षमता का भी उल्लेख किया गया है।

बरसात में बढ़ जाती है समस्या, त्योहारों से पहले चिंता

विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि निश्चित और स्थायी व्यवस्था के अभाव में नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। बरसात के मौसम में स्थिति और विकट हो जाती है। त्योहारों का मौसम सामने है और ऐसे में नालियों की तत्काल सफाई नहीं हुई तो जल-जमाव और गंदगी की समस्या नागरिकों के लिए और परेशानी खड़ी कर सकती है।

संगठन का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर तत्काल पहल कर जाम नालियों की सफाई और सड़कों पर जमा गंदे पानी की निकासी सुनिश्चित की जा सकती है।

फूलडुंगरी से गुरुनानक मार्केट तक अधूरी व्यवस्था पर सवाल

सक्रिय संवेदना के अनुसार फूलडुंगरी से निकलने वाली नालियां कई जगह आधे रास्ते में ही समाप्त हो जाती हैं, जिससे जल निकासी की समस्या बनी रहती है। गुरुनानक मार्केट के आसपास जल-जमाव की समस्या भी सामने आती रहती है। वहीं गोपालपुर शिव मंदिर के समीप लंबे समय से जमा दूषित पानी को लेकर भी संगठन ने चिंता जताई है।

सड़कों पर बने गड्ढों में जब नालियों का दूषित पानी भर जाता है तो सबसे अधिक परेशानी पैदल चलने वाले लोगों को होती है। वाहनों के गुजरने पर गंदे पानी के छींटे लोगों के कपड़ों तक पहुंचते हैं। यह स्थिति केवल असुविधा नहीं, बल्कि शहर की स्वच्छता और नागरिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर सवाल भी खड़ा करती है।

आधी सदी से स्थायी समाधान का इंतजार

सक्रिय संवेदना का कहना है कि घाटशिला क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और लंबे समय से जिले का मुख्यालय बनने की आकांक्षा भी रखता आया है। ऐसे में शहर की मूलभूत नागरिक सुविधाओं में जल निकासी जैसी व्यवस्था का मजबूत होना आवश्यक है।

संगठन के अनुसार पिछले कई दशकों में नालियों और जल निकासी को लेकर प्रयास हुए हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब भी सामने नहीं आया है। जगह-जगह नालियां बनीं, कहीं उनका नवीकरण हुआ, कहीं सफाई हुई, लेकिन पूरे शहर को जोड़ने वाली समग्र ड्रेनेज व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी।

सक्रिय संवेदना की मांग—तत्काल सफाई से आगे बने दूरगामी योजना

सक्रिय संवेदना ने प्रशासन से केवल तत्काल नालियों की सफाई कराने की मांग नहीं की है, बल्कि घाटशिला शहरी क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक और मुकम्मल जल निकासी योजना तैयार करने की मांग की है। संगठन का मानना है कि नालियों की नियमित सफाई, उनकी मरम्मत, जल निकासी के अंतिम बिंदु तक समुचित व्यवस्था और रखरखाव के लिए स्थायी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस लिखित पहल को कितनी गंभीरता से लेते हैं। सक्रिय संवेदना ने उम्मीद जताई है कि इस बार प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशील पहल होगी और बजबजाती नालियां एवं जल-जमाव घाटशिला के नागरिक जीवन की स्थायी पहचान नहीं बनेंगे।