घाटशिला। घाटशिला शहर में रेलवे की जमीन के इस्तेमाल को लेकर एक ऐसा सवाल सामने आया है, जिसका जवाब रेलवे प्रशासन को अपने रिकॉर्ड के साथ देना चाहिए। स्टेशन के सुभाष चौक से रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले रास्ते के मुहाने पर स्थित नवीन होटल के सामने और आसपास की जमीन को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या रेलवे की जमीन का लंबे समय से होटल के व्यावसायिक उपयोग में इस्तेमाल किया जा रहा है?
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि इसी क्षेत्र में रेलवे की जमीन की सीमा को दर्शाने के लिए रेलवे की ओर से रेलिंग लगाई गई है। ऐसे में सवाल यह है कि रेलवे के भू-अभिलेख में इस हिस्से की वास्तविक स्थिति क्या है और नवीन होटल को इस जमीन के इस्तेमाल की अनुमति किस आधार पर मिली है?
ठेले वालों पर कार्रवाई, फिर होटल की जमीन की जांच क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों के अनुसार रेलवे पुलिस और रेलवे प्रशासन समय-समय पर चाय, नाश्ता और छोटे कारोबार करने वाले ठेले वालों को हटाते हैं। बड़े अधिकारियों के दौरे के समय भी छोटे दुकानदारों को हटाने की कार्रवाई की जाती है। लेकिन सुभाष चौक के बिल्कुल मुहाने पर वर्षों से दिखाई देने वाली इस कथित रेलवे भूमि के इस्तेमाल की कभी गंभीर जांच हुई या नहीं, यह सवाल अनुत्तरित है।
कानून क्या कहता है?
रेलवे की जमीन के संबंध में रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 147 महत्वपूर्ण है, जो बिना वैध अधिकार रेलवे संपत्ति के दुरुपयोग पर छह महीने तक की सजा अथवा जुर्माने का प्रावधान करती है। इसके अलावा सरकारी परिसर से अनधिकृत कब्जा हटाने के लिए Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Act, 1971 की प्रक्रिया लागू हो सकती है, जिसके तहत कारण बताओ नोटिस के बाद बेदखली का आदेश दिया जा सकता है।
रेलवे कराए सीमांकन, सामने आ जाएगा सच
इस पूरे मामले में सबसे आसान और पारदर्शी रास्ता है कि रेलवे की जमीन का आधिकारिक सीमांकन कराया जाए। रेलवे के इंजीनियरिंग/एस्टेट विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर राजस्व एवं रेलवे रिकॉर्ड के आधार पर जमीन की सीमा चिन्हित करें। दशकों से इस्तेमाल किया जा रहा हो तो भी सरकारी जमीन पर अधिकार अपने-आप वैध नहीं हो जाता—वैधता का आधार दस्तावेज और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति होती है।
होटल की खाद्य गुणवत्ता भी जांच के दायरे में क्यों नहीं?
मामला केवल जमीन तक सीमित नहीं है। Food Safety and Standards Act, 2006 की धारा 31 के अनुसार खाद्य कारोबार के लिए लाइसेंस आवश्यक है। स्थानीय स्तर पर होटल के आसपास गंदगी और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग को होटल के FSSAI लाइसेंस, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, भंडारण और किचन की स्वच्छता की जांच करनी चाहिए।
रेलवे और प्रशासन से जमीनी आवाज के सवाल
1. सुभाष चौक के मुहाने पर नवीन होटल के सामने स्थित विवादित भूमि का स्वामित्व किसका है?
2. क्या यह जमीन रेलवे के रिकॉर्ड में दर्ज है?
3. यदि जमीन रेलवे की है तो होटल संचालक को इसके इस्तेमाल की अनुमति किस अधिकारी ने दी?
4. क्या कोई लीज, लाइसेंस अथवा अन्य वैध अनुमति मौजूद है?
5. रेलवे ने पिछले दस वर्षों में इस स्थल का सीमांकन या अतिक्रमण सर्वे कराया है या नहीं?
6. रेलवे सुरक्षा बल/रेलवे प्रशासन द्वारा इस स्थान के संबंध में कभी नोटिस जारी किया गया या नहीं?
7. यदि छोटे ठेले वालों को रेलवे की जमीन से हटाया जाता है तो बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान के मामले में समान नियम क्यों नहीं लागू होंगे?
8. खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस होटल का आखिरी निरीक्षण कब किया?
9. होटल का FSSAI लाइसेंस वर्तमान में वैध है या नहीं?
10. होटल के आसपास की स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच कब की गई?
अब जांच होनी चाहिए, आरोप नहीं
जमीनी आवाज स्पष्ट करना चाहता है कि किसी होटल संचालक को बिना दस्तावेज देखे अतिक्रमणकारी घोषित करना पत्रकारिता नहीं है। लेकिन सार्वजनिक जमीन से जुड़ा सवाल उठाना भी जरूरी है। इसलिए रेलवे प्रशासन से मांग है कि मौके का आधिकारिक सीमांकन कराया जाए और रेलवे की जमीन का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।
जमीनी आवाज पूछता है—रेलवे की जमीन पर किसका अधिकार? रिकॉर्ड बताएगा सच या खामोशी ढकेगी सवाल?





