सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई अहम जानकारी

सूचना का अधिकार कानून आम नागरिक को सरकारी रिकॉर्ड और कार्रवाई की जानकारी हासिल करने का अधिकार देता है। लेकिन जब सवाल सीधे पुलिस रिकॉर्ड से जुड़े हों और जवाब निर्धारित समय में सामने न आए, तो सवाल सिर्फ एक आवेदक का नहीं रह जाता—सवाल पारदर्शिता और जवाबदेही का बन जाता है।

ग्राम बेनासूल, प्रखंड मुसाबनी निवासी अप्पू अधिकारी ने दिनांक 20 अगस्त 2026 को सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मुसाबनी थाना के सूचना पदाधिकारी-सह-थाना प्रभारी को आवेदन देकर कई महत्वपूर्ण सूचनाएं मांगी हैं। आवेदन में पुराने थाना ज्ञापनों, जमीन विवाद से जुड़े मामलों, पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और पूर्व में दिए गए आवेदनों की स्थिति से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं। लेकिन एक महीने का समय बीत जाने के बावजूद आवेदक को मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है, ऐसा अप्पू अधिकारी का कहना है।

2016 के थाना ज्ञापन ने खड़ा किया पहला बड़ा सवाल

अप्पू अधिकारी ने अपने आरटीआई आवेदन में मुसाबनी थाना के ज्ञापन संख्या 343/16, दिनांक 24 जून 2016 का उल्लेख किया है। बताया गया है कि उक्त ज्ञापन में एक सवाल के जवाब में कहा गया था कि पुलिस पदाधिकारी के विरुद्ध मामला दर्ज करने के लिए वरीय पदाधिकारी के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब अप्पू अधिकारी ने सीधा सवाल पूछा है—मुसाबनी थाना ने वरीय पदाधिकारी को आवेदन कब भेजा? क्या आवेदन भेजा गया था? यदि भेजा गया था तो उसकी तारीख क्या थी और उस पर क्या कार्रवाई हुई? इसी से संबंधित विस्तृत जानकारी और अभिलेख की मांग आरटीआई के माध्यम से की गई है।

महिंद्रा एंड महिंद्रा को भेजे गए पुराने पत्र का भी मांगा हिसाब

आरटीआई आवेदन में मुसाबनी थाना के ज्ञापन संख्या 765/15, दिनांक 29 अक्टूबर 2015 का भी उल्लेख किया गया है। आवेदक ने महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी, सरायकेला रोड, जमशेदपुर को थाना द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन की छायाप्रति तथा कंपनी की ओर से दिए गए जवाब की छायाप्रति उपलब्ध कराने की मांग की है। यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पुलिस ने क्या कार्रवाई की, बल्कि यह भी पूछा गया है कि पुलिस ने किस आधार पर क्या रिपोर्ट भेजी और संबंधित कंपनी ने उसके जवाब में क्या कहा।

FIR में जमीन का खाता-प्लॉट कौन-सा?

अप्पू अधिकारी ने थाना में दर्ज प्राथमिकी संख्या 18/2021, 15/2024 और 3/2005 का उल्लेख करते हुए जमीन विवाद से जुड़ी जानकारी मांगी है। उनका सवाल है कि इन मामलों में जमीन विवाद के कारण उनके विरुद्ध 107 तथा 126 के तहत कार्रवाई किस जमीन को लेकर की गई थी। इसके लिए उन्होंने संबंधित जमीन का खाता नंबर, प्लॉट नंबर और संबंधित अभिलेख/दस्तावेज की जानकारी मांगी है।

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि कार्रवाई किसी विशिष्ट जमीन विवाद के कारण हुई, तो उस जमीन की पहचान और उससे संबंधित सरकारी रिकॉर्ड सूचना के माध्यम से स्पष्ट किए जा सकते हैं।

22 जुलाई 2025, 18 अक्टूबर 2025 और 29 जुलाई 2026—क्या हुआ था?

अप्पू अधिकारी ने अपने आवेदन में 22 जुलाई 2025, 18 अक्टूबर 2025 और 29 जुलाई 2026 को मुसाबनी थाना में दिए गए आवेदनों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने पूछा है कि इन आवेदनों पर थाना स्तर से अब तक क्या कार्रवाई की गई, यदि कार्रवाई हुई तो उसकी तारीख क्या है, किस अधिकारी ने की, क्या रिपोर्ट बनी और क्या किसी वरीय अधिकारी को भेजी गई। इन सवालों के जवाब भी आरटीआई के जरिए मांगे गए हैं।

26 नवंबर 2022 के आवेदन पर भी मांगी गई जानकारी

आरटीआई में शिव शंकर सिंह द्वारा 26 नवंबर 2022 को दिए गए आवेदन का भी उल्लेख है। अप्पू अधिकारी ने पूछा है कि उस आवेदन पर मुसाबनी थाना द्वारा क्या कार्रवाई की गई और उससे संबंधित अभिलेख क्या हैं। यानी आरटीआई आवेदन एक-दो घटनाओं तक सीमित नहीं है, इसमें वर्ष 2005 से लेकर वर्ष 2026 तक के अलग-अलग पुलिस रिकॉर्ड और कार्रवाई से संबंधित जानकारी मांगी गई है।

मुसाबनी थाने में अब तक कितने मामले? किसने दर्ज कराए?

सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक यह भी है कि अब तक मुसाबनी थाना में अप्पू अधिकारी के विरुद्ध कितने मामले दर्ज किए गए हैं और वे मामले किन-किन व्यक्तियों द्वारा दर्ज कराए गए। इसकी भी पूरी जानकारी मांगी गई है। यह जानकारी सामने आने के बाद संबंधित मामलों की संख्या, समय और शिकायतकर्ताओं के बारे में तथ्यात्मक तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

आरटीआई की समयसीमा बीती तो सवाल उठना स्वाभाविक

सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 7(1) के अनुसार सामान्य स्थिति में सूचना के अनुरोध पर निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्णय दिया जाना होता है। कानून में सामान्यतः 30 दिनों की समयसीमा निर्धारित है। वहीं अधिनियम की धारा 19 में यह प्रावधान है कि यदि आवेदक को निर्धारित समय में निर्णय नहीं मिलता है, तो वह प्रथम अपील कर सकता है।

ऐसे में अब सवाल यह है कि 20 अगस्त 2026 को दिए गए आवेदन पर एक महीने बाद भी सूचना उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई? क्या रिकॉर्ड जुटाने में समय लग रहा है? क्या मांगी गई सूचना किसी अन्य कार्यालय से संबंधित है? क्या किसी बिंदु पर कानूनी कारण से सूचना रोकी जा रही है? या फिर आवेदन पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई ही नहीं हुई? इन सवालों का उत्तर मुसाबनी थाना के संबंधित सूचना पदाधिकारी ही दे सकते हैं।

अनुज कुमार सिंह का तबादला हो चुका, अब वर्तमान थाना प्रभारी की भूमिका पर नजर

गौरतलब है कि जिन परिस्थितियों में यह आरटीआई आवेदन सामने आया, उस दौरान मुसाबनी थाना प्रभारी रहे अनुज कुमार सिंह का तबादला हो चुका है। उनके कार्यकाल में इस आवेदन पर क्या कार्रवाई हुई, जवाब क्यों नहीं दिया गया अथवा यदि कोई प्रक्रिया लंबित थी तो उसका कारण क्या था—इसका स्पष्ट उत्तर संबंधित अधिकारी ही दे सकते हैं। अब देखना यह है कि वर्तमान मुसाबनी थाना प्रभारी इस मामले को किस गंभीरता से लेते हैं और आरटीआई आवेदन पर आगे क्या कार्रवाई होती है।

जमीनी आवाज का सवाल

जमीनी आवाज के पास उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह मामला केवल एक आरटीआई आवेदन और उसके जवाब का नहीं है। यह उस सवाल से जुड़ा है कि एक आम नागरिक जब पुलिस रिकॉर्ड और अपने विरुद्ध हुई कार्रवाई का दस्तावेजी हिसाब मांगता है, तो उसे जवाब पाने के लिए आखिर कितना इंतजार करना पड़ेगा?

यह भी ध्यान देने योग्य है कि किसी व्यक्ति के निर्दोष या दोषी होने का अंतिम निष्कर्ष केवल आरटीआई में मांगी गई जानकारी से नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए संबंधित मामलों के न्यायिक रिकॉर्ड और सक्षम प्राधिकारी के आदेश देखना आवश्यक होगा। लेकिन यदि किसी नागरिक के विरुद्ध कार्रवाई हुई है और वह उसी कार्रवाई से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड, जमीन का विवरण, पुलिस रिपोर्ट और कार्रवाई की स्थिति जानना चाहता है, तो उसके सवालों का कानून के अनुरूप जवाब मिलना पारदर्शिता की कसौटी पर महत्वपूर्ण है।

अब निगाहें मुसाबनी थाना पर हैं—क्या रिकॉर्ड बोलेगा, या सवाल यूं ही फाइलों में दबे रहेंगे?