असित भट्टाचार्य की रिपोर्ट

स्थान: जलालपुर, अम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश

किताबों से निकलकर प्रयोगशाला की दुनिया में पहुंचे विद्यार्थी: मोहसिन पब्लिक स्कूल में ‘भारत विज्ञान यात्रा’ ने जगाई वैज्ञानिक सोच की अलख

प्रयोगों ने खोले विज्ञान के रहस्य, सवालों से बढ़ी बच्चों की जिज्ञासा; अमर पाल सिंह, एस.टी. अली और दिशांक श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को दिखाई अनुसंधान और नवाचार की राह।

‘विकसित भारत @ 2047’ के सपने को साकार करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी; प्रश्नोत्तर सत्र में दस प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित।

जलालपुर। विज्ञान केवल किताबों में लिखे सिद्धांतों और परीक्षाओं में मिलने वाले अंकों तक सीमित नहीं है। यह हमारे आसपास घटने वाली घटनाओं को समझने, सवाल पूछने, तर्क करने और नए समाधान तलाशने की प्रक्रिया है। इसी सोच को विद्यार्थियों के बीच मजबूत करने की सार्थक पहल रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले के जलालपुर स्थित मोहसिन पब्लिक स्कूल में देखने को मिली। यहां आयोजित ‘भारत विज्ञान यात्रा’ ने वैज्ञानिक प्रयोगों, रोचक गतिविधियों और संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों के सामने विज्ञान की एक नई दुनिया प्रस्तुत की।

कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना, विज्ञान एवं तकनीक के प्रति उनकी रुचि बढ़ाना और उन्हें भविष्य में अनुसंधान, अंतरिक्ष विज्ञान तथा तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना था। आयोजन ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि किसी वैज्ञानिक सिद्धांत को केवल पढ़ लेना पर्याप्त नहीं है; उसे प्रयोगों और व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

प्रयोगों ने बढ़ाई जिज्ञासा, विज्ञान को समझने का मिला व्यावहारिक अवसर

‘भारत विज्ञान यात्रा’ की टीम ने विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों और प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों से संवाद किया। इन गतिविधियों का उद्देश्य विज्ञान को कठिन विषय मानने की धारणा को बदलना और उसे सरल, रोचक तथा दैनिक जीवन से जुड़ा हुआ बनाना था।

विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझने, आसपास होने वाली घटनाओं का अवलोकन करने और उनके पीछे छिपे कारणों को जानने के लिए प्रेरित किया गया। बच्चों की सक्रिय भागीदारी और सीखने की उत्सुकता ने कार्यक्रम को खास बना दिया।

टीम ने संदेश दिया कि वैज्ञानिक सोच की शुरुआत एक सवाल से होती है। जब कोई विद्यार्थी किसी घटना को देखकर उसके कारणों को जानना चाहता है, तर्क करता है और प्रयोग के माध्यम से उत्तर खोजने का प्रयास करता है, तभी उसके भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होता है।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि विद्यार्थियों को किसी भी जानकारी को बिना समझे स्वीकार करने के बजाय सवाल पूछने, तथ्यों को परखने और तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने की आदत विकसित करनी चाहिए। यही प्रवृत्ति उन्हें भविष्य में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती है।

खगोल विज्ञान से अनुसंधान तक, विशेषज्ञों ने दिखाई संभावनाओं की राह

कार्यक्रम में भारत विज्ञान यात्रा के प्रमुख सदस्य एवं विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इनमें खगोलशास्त्री, वैज्ञानिक एवं खगोल विज्ञान प्रशिक्षक तथा वी.बी.एस. प्लेनेटेरियम, गोरखपुर से जुड़े अमर पाल सिंह; भारत विज्ञान यात्रा के संस्थापक एस.टी. अली तथा सह-संस्थापक दिशांक श्रीवास्तव शामिल रहे।

टीम के सदस्यों ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच के महत्व, प्रयोगों के माध्यम से सीखने और भविष्य में विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी दी। उनका प्रयास था कि बच्चे विज्ञान को केवल पाठ्यक्रम का हिस्सा न मानें, बल्कि इसे दुनिया को समझने और समस्याओं के समाधान खोजने का माध्यम बनाएं।

भारत विज्ञान यात्रा के संस्थापक एस.टी. अली ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान और युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए ऐसा वातावरण तैयार करना आवश्यक है, जहां वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहन मिले और बच्चों को बचपन से ही सवाल पूछने, प्रयोग करने तथा नई चीजें सीखने के अवसर प्राप्त हों।

वहीं, सह-संस्थापक दिशांक श्रीवास्तव ने कहा कि विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और आधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं। ऐसे समय में विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर से वैज्ञानिक सोच विकसित करने और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

खगोल विज्ञान से जुड़े अमर पाल सिंह ने भी विद्यार्थियों की प्रतिभा और वैज्ञानिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की पहल बच्चों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

प्रश्नोत्तर सत्र में दस विद्यार्थियों को मिला सम्मान

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण प्रश्नोत्तर सत्र रहा। इसमें विद्यार्थियों को अपनी समझ, जिज्ञासा और प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। आयोजन के दौरान दस विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के नाम:

1. अबू बकर

2. अस्मा नवाज़

3. हलीमा सादिया

4. मोहम्मद अयान

5. मोहम्मद अजफर

6. मोहम्मद फिरोज

7. फ़िज़ा मरियम

8. शाज़ीन जहरा

9. आरिबा शेख

10. नायरा ख़ान

विद्यार्थियों को सम्मानित करने का उद्देश्य उनका आत्मविश्वास बढ़ाना तथा विज्ञान, शिक्षा और रचनात्मक गतिविधियों के प्रति उनकी रुचि को प्रोत्साहित करना था। इस पहल ने यह संदेश दिया कि बच्चों की जिज्ञासा और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित किया जाए, तो वे अपनी क्षमताओं को बेहतर ढंग से विकसित कर सकते हैं।

विद्यालयों में नियमित पढ़ाई के साथ ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

‘विकसित भारत @ 2047’ के लिए वैज्ञानिक सोच जरूरी

भारत विज्ञान यात्रा का प्रमुख उद्देश्य देश के विद्यार्थियों तक विज्ञान को सरल, रोचक और व्यावहारिक रूप में पहुंचाना है। इस पहल की सोच है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

हालांकि, तकनीकी प्रगति के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास भी उतना ही जरूरी है। किसी देश की वैज्ञानिक क्षमता केवल उसकी प्रयोगशालाओं, मशीनों या तकनीकी उपलब्धियों से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इससे भी तय होती है कि वहां के बच्चों को सवाल पूछने, तर्क करने, समस्याओं को समझने और उनके समाधान खोजने के लिए कितना प्रोत्साहित किया जाता है।

आज के विद्यार्थी ही भविष्य के वैज्ञानिक, इंजीनियर, शोधकर्ता और नवप्रवर्तक बनेंगे। उन्हें सही मार्गदर्शन, सीखने के अवसर और प्रयोग करने की स्वतंत्रता उपलब्ध कराना देश के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इसी सोच के साथ भारत विज्ञान यात्रा विद्यार्थियों तक वैज्ञानिक जागरूकता पहुंचाने का प्रयास कर रही है, ताकि विज्ञान के प्रति रुचि केवल बड़े शहरों या चुनिंदा शिक्षण संस्थानों तक सीमित न रहे।

विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों के सहयोग से सफल आयोजन

मोहसिन पब्लिक स्कूल, जलालपुर में आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के प्रधानाचार्य दानिश आलम, प्रबंधक परवेज आलम तथा दिवाकर चौरसिया का विशेष सहयोग रहा।

विद्यालय के शिक्षक मोहम्मद इमरान काशमी, सहरयार, आलम सर सहित अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों की सहभागिता ने आयोजन को सार्थक बनाया।

विद्यालय परिसर में हुई इस पहल ने विद्यार्थियों को विज्ञान के व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराने के साथ-साथ सीखने की नई संभावनाओं के प्रति उत्साहित किया। ऐसे आयोजन शिक्षा को कक्षा की चारदीवारी से आगे ले जाकर वास्तविक जीवन से जोड़ने में मदद करते हैं।

विज्ञान से जागरूकता, नवाचार से आत्मनिर्भरता

मोहसिन पब्लिक स्कूल में ‘भारत विज्ञान यात्रा’ का आयोजन केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास रहा।

कार्यक्रम का मूल संदेश स्पष्ट था—विज्ञान केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने का विषय नहीं है। यह जीवन को समझने, समाज की समस्याओं का समाधान खोजने और देश के विकास में योगदान देने का सशक्त माध्यम है।

जब विद्यार्थी सवाल पूछना सीखते हैं, प्रयोगों के माध्यम से उत्तर खोजते हैं और तथ्यों के आधार पर अपनी समझ विकसित करते हैं, तभी नवाचार की नींव मजबूत होती है।

संदेश स्पष्ट है: हर विद्यार्थी में वैज्ञानिक सोच विकसित होगी, तभी विकसित भारत का सपना और मजबूत होगा। विज्ञान से जागरूकता, नवाचार से आत्मनिर्भरता और युवा प्रतिभा से राष्ट्र निर्माण की राह प्रशस्त होगी।

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