पुरखों की संस्कृति को जीवित रखना हमारा संकल्प : लालटू महतो

आदित्यपुर फुटबॉल मैदान में रविवार को सजेगा भव्य करमा महोत्सव, "डहरे करम" रहेगा मुख्य आकर्षण

झारखंड की मिट्टी, खेत-खलिहान और पुरखों की लोक परंपराओं की खुशबू रविवार को आदित्यपुर फुटबॉल मैदान में देखने को मिलेगी। कुड़मी सेना टोटेमिक के तत्वावधान में 27 सितंबर, रविवार को भव्य करमा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव में झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।

शनिवार शाम आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष लालटू महतो ने कहा कि झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और पुरखों से मिली परंपराओं को जीवित रखना संगठन का संकल्प है। उन्होंने कहा कि वीर शहीद सुनील महतो का भी सपना था कि समाज अपनी संस्कृति और जड़ों से मजबूती से जुड़ा रहे।

"डहरे करम" में दिखेगा संस्कृति का जीवंत रंग

महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण "डहरे करम" होगा। इसके तहत हजारों बहनें खरकई ब्रिज से करम डाल लेकर पारंपरिक करम गीतों पर थिरकते हुए जुलूस के रूप में आदित्यपुर फुटबॉल मैदान पहुंचेंगी।

प्रदेश अध्यक्ष पिंकी महतो ने कहा कि आधुनिक दौर में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना बेहद जरूरी है। बूढ़ी नाच और पाता नाच जैसी लोक परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार पर हैं, इसलिए इन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।

झूमर और सांस्कृतिक दलों के लिए पुरस्कार

नेता प्रकाश कुमार महतो उर्फ चश्मा वाला ने बताया कि महोत्सव में शामिल होने वाले झूमर एवं सांस्कृतिक दलों के लिए आकर्षक पुरस्कार भी रखे गए हैं: प्रथम पुरस्कार ₹25,000, द्वितीय ₹18,000, तृतीय ₹12,000 और चतुर्थ ₹8,000।

आयोजकों के अनुसार महोत्सव को लेकर आदित्यपुर फुटबॉल मैदान में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सवाल सिर्फ एक त्योहार मनाने का नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, अपनी बोली, अपने गीत और पुरखों की उस विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी है, जिसे समय की तेज रफ्तार कहीं पीछे न छोड़ दे।