जमशेदपुर ..... विजय कुमार गोप की रिपोर्ट


टाटा कंपनी के गठन के दौरान विस्थापित हुए 18 मौजा के मूल रैयत खतियानधारी विस्थापितों के सर्वे की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो के नेतृत्व में मंगलवार को प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर विस्थापित रैयतों के सर्वे से संबंधित प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजने की मांग की।

मंच ने यह ज्ञापन राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के ज्ञापांक 07 विविध (जनावेदन) 24/2025 3334(07), दिनांक 11 दिसंबर 2025 के आलोक में सौंपा। मंच की मांग है कि टाटा कंपनी बनने के दौरान विस्थापित हुए 18 मौजा के मूल रैयत खतियानधारी परिवारों का विधिवत सर्वे कराया जाए, ताकि उनके भूमि अधिकार और विस्थापन से जुड़े मामलों का तथ्यात्मक रिकॉर्ड तैयार हो सके।

मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो ने कहा कि झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के पत्रांक 1372/HM/2026 के माध्यम से 30 दिसंबर 2025, 10 फरवरी 2026, 24 मई 2026 और 17 जुलाई 2026 को जिला उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम के समक्ष संबंधित रैयत खतियानधारियों ने जमीन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज जमा किए हैं। इसके बावजूद, मंच का आरोप है कि अब तक जिला प्रशासन की ओर से दस्तावेजों के साथ संबंधित प्रस्ताव झारखंड सरकार को नहीं भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि वर्षों से विस्थापन और जमीन से जुड़े अधिकारों का सवाल झेल रहे मूल रैयतों ने प्रशासन के समक्ष आवश्यक कागजात उपलब्ध करा दिए हैं। ऐसे में अब प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। मंच ने उपायुक्त से आग्रह किया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए भू-राजस्व विभाग और झारखंड सरकार को टाटा विस्थापितों के सर्वे से संबंधित प्रस्ताव अविलंब भेजा जाए, ताकि सर्वे की प्रक्रिया शुरू हो सके और खतियानधारी रैयतों को उनके अधिकारों के संबंध में न्याय मिल सके।

ज्ञापन सौंपने के दौरान हरमोहन महतो के साथ रामचंद्र महतो, सानन्द गौड़, मधुसूदन महतो, निमाई गौड़, संजय मंडल, मनोज बेदिया, समतुल सिंह भूमिज, रामसिंह, गया हो, गोपी बोदरा, टुनू लामाय, सोमाय हो, गौर हेम्ब्रम सहित मंच के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।