जमीनी आवाज | विशेष रिपोर्ट

झारखंड | असित भट्टाचार्य

दशहरा 21 अक्टूबर को भी मनाने का हवाला, सरकारी छुट्टी घोषित करने की मांग; JHAROTEF ने सरकार को लिखा पत्र

प्रांतीय अध्यक्ष विक्रांत कुमार सिंह ने कार्मिक विभाग के सचिव को भेजा पत्र, 21 अक्टूबर को विजयादशमी का अवकाश घोषित करने का किया अनुरोध।

 पत्र में त्योहार की तिथि और सूर्योदय से जुड़ी परिस्थितियों का दिया गया हवाला; अब राज्य सरकार के निर्णय पर नजर।

त्योहार की तिथि को लेकर अवकाश की मांग

झारखंड में विजयादशमी के अवसर पर सरकारी अवकाश को लेकर झारखंड ऑफिसर्स, टीचर्स एंड एम्प्लॉइज फेडरेशन (JHAROTEF) ने राज्य सरकार से 21 अक्टूबर 2026 को भी अवकाश घोषित करने का अनुरोध किया है।

फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष विक्रांत कुमार सिंह ने 12 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव को पत्र भेजा।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि राज्य सरकार की घोषित अवकाश सूची के अनुसार 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी का अवकाश निर्धारित है। वहीं, त्योहार की तिथि और सूर्योदय से जुड़ी परिस्थितियों का हवाला देते हुए फेडरेशन ने कहा है कि कुछ स्थानों पर 21 अक्टूबर को भी दशहरा मनाया जा रहा है।

इसी आधार पर संगठन ने राज्य सरकार से 21 अक्टूबर को भी विजयादशमी का अवकाश घोषित करने की मांग की है।

सरकार से उचित कार्रवाई का अनुरोध

फेडरेशन ने अपने पत्र के माध्यम से संबंधित विभाग से आग्रह किया है कि त्योहार की तिथि को लेकर बनी स्थिति पर विचार करते हुए 21 अक्टूबर 2026 को भी सरकारी अवकाश घोषित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

इस मांग के बाद अब संबंधित शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की नजर राज्य सरकार के निर्णय पर रहेगी। हालांकि, अवकाश को लेकर अंतिम स्थिति सरकार की आधिकारिक अधिसूचना से ही स्पष्ट होगी।

जमीनी आवाज की नजर

त्योहारों की तिथि और सरकारी अवकाश को लेकर स्पष्ट जानकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। JHAROTEF की ओर से 21 अक्टूबर को अतिरिक्त अवकाश घोषित करने की मांग की गई है, लेकिन मांग और सरकारी आदेश के बीच अंतर समझना जरूरी है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे अवकाश की मांग से संबंधित खबर के रूप में ही देखा जाना चाहिए। जब तक राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक 21 अक्टूबर को सरकारी छुट्टी घोषित होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।

जमीनी आवाज अपने पाठकों तक तथ्यपरक और जिम्मेदार जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।