आजसू पार्टी से हरेलाल महतो के इस्तीफे के बाद झारखंड की राजनीति में उठे सवालों के बीच घाटशिला की सियासत से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। बुधवार को दामपाड़ा मौजा में जमीनी आवाज से बातचीत के दौरान आजसू के वरिष्ठ नेता एवं घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से चार बार चुनाव लड़ चुके कान्हू सामंत ने हरेलाल महतो के राजनीतिक सफर, आर्थिक ताकत और आजसू से अलग होने के फैसले पर खुलकर अपनी बात रखी।
हाल के दिनों में हरेलाल महतो की भाजपा नेताओं के साथ नजदीकी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हैं। हालांकि भाजपा में उनके औपचारिक रूप से शामिल होने की अंतिम पुष्टि अलग विषय है, लेकिन आजसू से उनके इस्तीफे ने ईचागढ़ समेत कोल्हान की राजनीति में नए सवाल जरूर खड़े किए हैं।
“पैसे से मजबूत हो सकते हैं हरेलाल, राजनीति में नहीं”
हरेलाल महतो की राजनीतिक हैसियत को लेकर पूछे गए सवाल पर कान्हू सामंत ने कहा कि हरेलाल महतो आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण से वे मजबूत नहीं हैं।
सामंत के अनुसार व्यवसाय और राजनीति की ताकत अलग-अलग होती है। आर्थिक सामर्थ्य से कोई व्यक्ति बड़ा कारोबारी बन सकता है, लेकिन राजनीतिक जमीन बनाने के लिए वर्षों तक जनता के बीच रहना, संगठन खड़ा करना और लगातार संघर्ष करना पड़ता है।
उन्होंने हरेलाल महतो के व्यवसाय का उल्लेख करते हुए कहा कि HLM के नाम से चलने वाली ट्रांसपोर्ट कंपनी भी उनसे जुड़ी है, लेकिन आर्थिक मजबूती को राजनीतिक जनाधार का पैमाना नहीं माना जा सकता।
सुदेश महतो को कमजोर समझना राजनीतिक भूल—कान्हू सामंत
सुदेश महतो की राजनीतिक पकड़ कमजोर होने की चर्चाओं पर कान्हू सामंत ने कहा कि सुदेश महतो ने कम उम्र में चुनावी राजनीति शुरू की और करीब ढाई दशक से अधिक समय में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की।
उन्होंने कहा कि सुदेश महतो ने चुनाव जीते भी हैं और हार का सामना भी किया है, लेकिन इसके बाद राजनीतिक वापसी की है। सामंत के अनुसार किसी नेता की राजनीति को केवल एक चुनाव या किसी दूसरे नेता की सक्रियता के आधार पर नहीं आंका जा सकता।
उन्होंने जयराम महतो और भाजपा की राजनीतिक सक्रियता के संदर्भ में सुदेश महतो की राजनीतिक जमीन कमजोर होने की चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सुदेश महतो के नेतृत्व में संगठन से जुड़े कई लोगों ने विधानसभा तक का सफर तय किया है।
2019 और 2024 में चुनाव लड़े, दोनों बार हार का सामना
कान्हू सामंत ने हरेलाल महतो के चुनावी सफर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हरेलाल महतो वर्ष 2019 और 2024 में ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन दोनों चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
सामंत ने कहा कि दो चुनाव लड़ना और लंबे समय का मजबूत राजनीतिक जनाधार तैयार करना अलग-अलग बातें हैं।
“आजसू ने जिस मुकाम तक पहुंचाया, कोई दूसरी पार्टी नहीं दे सकती”
कान्हू सामंत ने कहा कि आजसू पार्टी ने हरेलाल महतो को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं और राजनीतिक पहचान बनाने का मंच दिया।
उन्होंने कहा कि किसी नेता का दूसरे राजनीतिक दल में जाने का फैसला उसका अपना राजनीतिक निर्णय है, लेकिन जिस संगठन ने राजनीतिक पहचान और मंच दिया, उसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुदेश महतो की राजनीतिक जमीन पर गिनाईं उपलब्धियां
कान्हू सामंत ने सुदेश महतो के मंत्री रहते किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने पंचायत चुनावों में महिलाओं के 50 प्रतिशत आरक्षण, ग्रामीण विकास और गांवों तक पहुंचने जैसे मुद्दों को सुदेश महतो की राजनीतिक पहचान से जोड़ा।
उन्होंने गुड़ाबांदा क्षेत्र के कुड़ियां गांव में सुदेश महतो द्वारा रात बिताने का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मंत्री रहते हुए उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को करीब से समझने का प्रयास किया था।
राष्ट्रीय खेलों और खेलगांव का भी किया जिक्र
कान्हू सामंत ने झारखंड में आयोजित राष्ट्रीय खेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय सुदेश महतो खेल मंत्री थे और उनके कार्यकाल में खेल से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं के विकास पर काम हुआ।
उन्होंने खेलगांव का भी उल्लेख किया और इसे सुदेश महतो के कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल बताया।
घाटशिला में अपना राजनीतिक आधार होने का दावा
कान्हू सामंत ने अपने राजनीतिक सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बिहार विधानसभा के समय भी उन्होंने घाटशिला क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। बाद में झारखंड विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।
कान्हू सामंत ने दावा किया कि घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में आज भी उनका अपना राजनीतिक आधार मौजूद है और वर्षों की सक्रियता के कारण यह आधार कायम है।
दामपाड़ा से उठता सवाल—दल बदलेगा तो क्या बदलेगा?
हरेलाल महतो के इस्तीफे के बाद सवाल सिर्फ यह नहीं है कि उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा। बड़ा सवाल यह भी है कि राजनीतिक दल बदलने से जमीन पर जनता की राजनीति कितनी बदलती है?
भारतीय राजनीति में नेताओं के एक दल से दूसरे दल में जाने के कई उदाहरण सामने आते रहे हैं। संगठन और राजनीतिक समीकरण बदलते हैं, लेकिन जनता के सवाल अपनी जगह बने रहते हैं।
कान्हू सामंत ने इसी संदर्भ में कहा कि केवल आर्थिक ताकत के आधार पर राजनीतिक विकल्प तैयार नहीं होता। उनके अनुसार राजनीति में संगठन, कार्यकर्ता, जनता से संबंध और लंबे समय की राजनीतिक जमीन महत्वपूर्ण होती है।
अब हरेलाल महतो के इस्तीफे के बाद उनकी अगली राजनीतिक दिशा क्या होगी और इसका ईचागढ़ समेत कोल्हान की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, इसका जवाब आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से मिलेगा।
जमीनी आवाज का सवाल सीधा है—सियासत में कुर्सी बदलना आसान है, लेकिन क्या जनता का भरोसा भी इतनी आसानी से बदला जा सकता है?