जब अपनों के अंतिम संस्कार के लिए भी कम पड़ गए पैसे, तब मदद के लिए आगे आए घाटशिला के विधायक सोमेश चंद्र सोरेन

जमशेदपुर के टाटा मोटर्स अस्पताल में पहल कर मिहिर भगत के पार्थिव शरीर को निःशुल्क रिलीज कराने की व्यवस्था की, आर्थिक संकट से जूझ रहे शोकाकुल परिवार को मिली राहत।

राजनीति से ऊपर उठकर मानवता की मिसाल—मुश्किल घड़ी में जरूरतमंद परिवार के साथ खड़े हुए जनप्रतिनिधि, संवेदनशील पहल ने दिखाया कि जनसेवा का असली अर्थ क्या है।

जमीनी आवाज | विशेष रिपोर्ट

घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम।

किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोने का दुख शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। लेकिन जब इस असहनीय पीड़ा के बीच आर्थिक तंगी भी आड़े आ जाए और परिजनों को अपने प्रियजन का पार्थिव शरीर तक अस्पताल से प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़े, तो यह स्थिति किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर सकती है। ऐसे ही एक दुखद घटनाक्रम में घाटशिला के विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए जरूरतमंद परिवार की सहायता के लिए पहल की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घाटशिला क्षेत्र के बड़ाजुड़ी निवासी मिहिर भगत पिछले कई दिनों से जमशेदपुर स्थित टाटा मोटर्स अस्पताल में इलाजरत थे। दुर्भाग्यवश, एक दिन पूर्व उनका निधन हो गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक ओर अपने प्रियजन को खोने का गहरा सदमा था, तो दूसरी ओर अस्पताल का बिल चुकाने में असमर्थता के कारण उनके पार्थिव शरीर को प्राप्त करने में परेशानी हो रही थी।

जब आर्थिक मजबूरी दुख की घड़ी को और कठिन बना दे

किसी अपने के निधन के बाद परिवार की पहली इच्छा यही होती है कि दिवंगत व्यक्ति को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाए। लेकिन आर्थिक अभाव जब इस अंतिम जिम्मेदारी के रास्ते में बाधा बन जाए, तो परिवार की पीड़ा और भी बढ़ जाती है। मिहिर भगत के परिजन भी इसी कठिन परिस्थिति से गुजर रहे थे। उनके सामने अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार की चिंता थी, लेकिन आर्थिक विवशता के कारण रास्ता आसान नहीं था।

इसी बीच घाटशिला के विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने मामले में पहल की। वे जमशेदपुर स्थित टाटा मोटर्स अस्पताल पहुंचे और आवश्यक कार्रवाई करते हुए मिहिर भगत के पार्थिव शरीर को निःशुल्क रिलीज कराने की व्यवस्था की, ताकि उनके परिजन पार्थिव शरीर को घर ले जाकर पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर सकें।

जनप्रतिनिधि की पहचान केवल पद से नहीं, संवेदनशीलता से भी होती है

विधायक सोमेश चंद्र सोरेन की इस पहल को केवल एक परिवार की सहायता के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह उस मानवीय जिम्मेदारी की याद दिलाती है, जो किसी भी जनप्रतिनिधि को जनता के प्रति निभानी चाहिए। जनसेवा का अर्थ केवल विकास योजनाओं, बैठकों और राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब कोई जरूरतमंद व्यक्ति संकट में हो और उसकी सहायता के लिए कोई आगे आए।

मिहिर भगत के परिवार के लिए यह समय अपूरणीय क्षति का है। ऐसे समय में विधायक की पहल ने कम से कम उस कठिनाई को दूर करने में मदद की, जिसके कारण परिवार अपने प्रियजन के पार्थिव शरीर को प्राप्त नहीं कर पा रहा था। दुख को समाप्त करना किसी के वश में नहीं, लेकिन दुख की घड़ी में किसी का सहारा बनना निश्चित रूप से मानवता का परिचायक है।

‘जमीनी आवाज’ की नजर में जनसेवा का यही मानवीय पक्ष महत्वपूर्ण है। राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, विचार अलग-अलग हो सकते हैं और जनप्रतिनिधियों के कामकाज की समीक्षा भी जरूरी है। लेकिन जब कोई जनप्रतिनिधि जरूरतमंद परिवार की परेशानी को समझकर सहायता के लिए आगे आता है, तो ऐसे सकारात्मक कार्यों को सामने लाना भी पत्रकारिता की जिम्मेदारी है।

विधायक सोमेश चंद्र सोरेन की यह पहल बताती है कि संवेदनशीलता और मानवीय सरोकार आज भी सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य हैं।

शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना

मिहिर भगत के निधन से उनके परिवार और परिचितों को हुई क्षति अपूरणीय है। ‘जमीनी आवाज’ दिवंगत मिहिर भगत के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता है और शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को इस कठिन समय में दुख सहन करने की शक्ति दें।

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