चाकुलिया प्रखंड के केंदाडांगरी गांव में काली पूजा की तैयारियां तेज, 75 फीट चौड़े भव्य पंडाल में दिखेगी मंदिर स्थापत्य की झलक; पश्चिम बंगाल से आए कारीगर निर्माण में जुटे।
जमीनी आवाज | विशेष रिपोर्ट
चाकुलिया, पूर्वी सिंहभूम।
आस्था जब सामूहिक संकल्प से जुड़ती है, तो एक छोटा-सा गांव भी अपनी पहचान दूर-दूर तक बना सकता है। पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड अंतर्गत केंदाडांगरी गांव में इस वर्ष काली पूजा को भव्य और यादगार बनाने की तैयारियां चल रही हैं। यहां श्रद्धालुओं को तिरुपति बालाजी मंदिर की स्थापत्य शैली से प्रेरित विशाल पूजा पंडाल देखने को मिलेगा। लगभग 80 फीट ऊंचे और 75 फीट चौड़े इस पंडाल को आकर्षक मंदिरनुमा स्वरूप देने की योजना है।
पंडाल की भव्यता ही इस आयोजन का एकमात्र आकर्षण नहीं होगी। इसके पीछे ग्रामीणों की वर्षों की मेहनत, सामूहिक सहयोग और धार्मिक आस्था की लंबी कहानी भी जुड़ी है। आयोजकों का प्रयास है कि इस बार केंदाडांगरी की काली पूजा अपनी विशिष्ट सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी आकर्षित करे।
2004 में छोटे पंडाल से शुरू हुआ सफर, अब भव्य आयोजन की तैयारी
केंदाडांगरी में काली पूजा की शुरुआत वर्ष 2004 में ग्रामीणों के सहयोग से एक छोटे-से पंडाल में हुई थी। समय के साथ लोगों की भागीदारी बढ़ती गई और पूजा का स्वरूप भी लगातार विस्तृत होता गया। आज यह आयोजन गांव की सामूहिक आस्था और सहयोग की पहचान बन चुका है।
आयोजन समिति के संरक्षक सरोज महापात्र के अनुसार, इस वर्ष पंडाल को विशेष रूप देने के लिए पश्चिम बंगाल के आगरा क्षेत्र से आए कारीगर जुटे हुए हैं। पंडाल के निर्माण के साथ-साथ देवी की प्रतिमा को भी आकर्षक और कलात्मक स्वरूप दिया जा रहा है। प्रतिमा निर्माण की जिम्मेदारी जूट के काम में दक्ष कारीगरों ने संभाली है। इसके अलावा लगभग 75 फीट ऊंचा विद्युत सज्जा से सुसज्जित तोरण द्वार भी बनाया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के स्वागत और आयोजन की भव्यता को बढ़ाएगा।
चाकुलिया से लगभग 15 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल की सीमा के निकट स्थित इस गांव में काली पूजा के दौरान कई दिनों तक उत्सव जैसा माहौल रहता है। इस बार भी समिति की योजना पूजा के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की है, ताकि धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा मिल सके।
जनप्रतिनिधियों की भागीदारी और ग्रामीणों का सहयोग बना आयोजन की ताकत
केंदाडांगरी की काली पूजा को भव्य रूप देने में ग्रामीणों के साथ विभिन्न जनप्रतिनिधियों और सामाजिक लोगों का सहयोग भी मिलता रहा है। आयोजन समिति के अनुसार, इस वर्ष भी कई प्रमुख लोगों के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। इनमें विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो, मंत्री दीपक बिरुआ, घाटशिला के विधायक सोमेश चंद्र सोरेन और पोटका के विधायक संजीव सरदार सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं। हालांकि, उनकी उपस्थिति की अंतिम पुष्टि संबंधित कार्यक्रम की आधिकारिक जानकारी से ही होगी।
ग्रामीणों के लिए यह आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यह गांव की एकजुटता, आपसी सहयोग और अपनी परंपरा को आगे बढ़ाने का अवसर भी है। वर्षों पहले छोटे स्तर पर शुरू हुई पूजा का आज इतने बड़े आयोजन की दिशा में आगे बढ़ना इस बात का उदाहरण है कि सामूहिक प्रयास से ग्रामीण क्षेत्र भी बड़े सांस्कृतिक आयोजनों की पहचान बन सकते हैं।
अब ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को उस पल का इंतजार है, जब तिरुपति बालाजी मंदिर की शैली से प्रेरित भव्य पंडाल अपने पूर्ण स्वरूप में सामने आएगा। रोशनी, सजावट, मां काली की आराधना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच केंदाडांगरी एक बार फिर आस्था और उत्सव के रंग में रंगने की तैयारी कर रहा है।
जमीनी आवाज की नजर: केंदाडांगरी की यह पहल बताती है कि किसी आयोजन की असली ताकत केवल उसकी ऊंचाई या भव्यता में नहीं, बल्कि उन लोगों के सामूहिक विश्वास में होती है, जो वर्षों तक मिलकर एक परंपरा को जीवित रखते हैं।
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