फेसबुक पोस्ट बनी कानूनी लड़ाई की वजह


सोशल मीडिया पर लिखी गई एक पोस्ट अब सीधे कानूनी लड़ाई की दहलीज तक पहुंच गई है। आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरे लाल महतो की ओर से शैलेंद्र महतो को अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजे जाने का मामला सामने आया है। मामला 18 सितंबर 2026 को फेसबुक पर प्रकाशित कथित आपत्तिजनक एवं मानहानिकारक पोस्ट से जुड़ा है।

नोटिस में हरे लाल महतो की ओर से आरोप लगाया गया है कि संबंधित फेसबुक पोस्ट में उनके विरुद्ध ऐसे कथन प्रकाशित किए गए, जिन्हें नोटिस में निराधार, आपत्तिजनक और मानहानिकारक बताया गया है। नोटिस के अनुसार, इस कथित पोस्ट से हरे लाल महतो की सामाजिक एवं राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और उनकी छवि प्रभावित हुई।

पोस्ट हटाने से लेकर सार्वजनिक माफी तक की मांग

अधिवक्ता के माध्यम से भेजे गए नोटिस में संबंधित फेसबुक पोस्ट को तत्काल हटाने तथा सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की गई है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति भविष्य में ऐसी सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से परहेज करे।

मामला सिर्फ पोस्ट हटाने तक सीमित नहीं है। नोटिस में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित मांगों का पालन नहीं किया गया तो मानहानि को लेकर आपराधिक कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ 2 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति के लिए दीवानी वाद दायर किया जा सकता है।

एक फेसबुक पोस्ट ने बढ़ाया कानूनी तापमान

सोशल मीडिया के दौर में राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप अब केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रह गए हैं। किसी व्यक्ति के खिलाफ सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों को लेकर कानूनी कार्रवाई की संभावना भी सामने आती रही है। सरायकेला का यह मामला भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है, जहां एक कथित फेसबुक पोस्ट के बाद मामला सीधे अधिवक्ता के नोटिस तक पहुंच गया है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कानूनी नोटिस में लगाए गए आरोप अभी न्यायालय द्वारा सिद्ध किए गए तथ्य नहीं हैं। नोटिस में हरे लाल महतो की ओर से अपना पक्ष रखा गया है। वहीं, शैलेंद्र महतो का पक्ष अथवा संबंधित फेसबुक पोस्ट की पूरी सामग्री भी खबर में उनके जवाब के साथ सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

अब निगाहें शैलेंद्र महतो के जवाब पर

2 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग और आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी के बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना यह होगा कि शैलेंद्र महतो इस कानूनी नोटिस का क्या जवाब देते हैं—क्या कथित पोस्ट को हटाया जाता है, सार्वजनिक माफी मांगी जाती है या फिर मामला अदालत की चौखट तक पहुंचता है।

जमीनी आवाज की नजर इस पूरे मामले के दस्तावेजी पक्ष और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर बनी रहेगी।