सरायकेला/पुरुलिया। झारखंड की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में रविवार को कुड़मी समाज की सामाजिक-सांस्कृतिक एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। टामना थाना क्षेत्र के कड़ाडी मैदान में आयोजित आदिवासी कुड़मी समाज के करम परब महाजुड़ान में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष जुटे। झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से लोगों के पहुंचने से पूरा क्षेत्र करम पर्व की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता के रंग में रंग गया।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी शामिल हुए और करीब एक घंटा बीस मिनट तक कार्यक्रम में मौजूद रहे। करम नृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच उन्होंने समाज के विकास, आंदोलन से जुड़े मामलों और भाषा-संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऐलान किए।

आंदोलन के मुकदमे वापस लेने का ऐलान

मुख्यमंत्री ने मंच से घोषणा की कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में कुड़मी आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामलों को वापस लिया जाएगा। यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुड़मी समाज लंबे समय से अपने विभिन्न अधिकारों और मांगों को लेकर आंदोलन करता रहा है। 2025 के आंदोलन के दौरान पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में सड़क और रेल अवरोध भी हुए थे।

कुड़मी विकास बोर्ड के लिए ₹50 करोड़

मुख्यमंत्री ने कुड़मी समाज के विकास के लिए बजट में ₹50 करोड़ के प्रावधान की बात कही। साथ ही कुड़मी विकास बोर्ड को जल्द सक्रिय करने की घोषणा की। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में विकास के लिए आवंटित राशि को और बढ़ाया जा सकता है।

कुर्माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल

करम महाजुड़ान के मंच से कुर्माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात भी कही गई। साथ ही राजबंशी भाषा को भी आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की बात सामने आई। कुड़मी समाज के लिए भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

रोजगार, जमीन रिकॉर्ड शुल्क और प्राकृतिक संसाधनों पर घोषणा

मुख्यमंत्री ने ग्रामीण रोजगार और विकास से जुड़ी योजनाओं के तहत अगले छह महीनों में प्रत्येक अंचल में विकास कार्य कराने की बात कही। मजदूरों को ₹300 प्रतिदिन मजदूरी तथा 125 दिनों के काम की व्यवस्था से जुड़े आंकड़े भी मंच से बताए गए। इसके अलावा जमीन के रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेजों के लिए लिए जाने वाले ₹10 शुल्क को समाप्त करने की घोषणा भी की गई। करम पर्व प्रकृति और पेड़-पौधों से गहराई से जुड़ा पर्व है, इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री ने पुरुलिया के पहाड़, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का भरोसा दिलाया और कहा कि क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित अथवा अवैज्ञानिक व्यावसायिक दोहन नहीं होने दिया जाएगा।

करम वृक्ष लगाया, स्थल पर किया साष्टांग प्रणाम

कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री मंच से नीचे उतरे और करम पेड़ का पौधा लगाया। इसके बाद उन्होंने करम स्थल पर साष्टांग प्रणाम किया। करम पर्व की सांस्कृतिक और प्रकृति-केंद्रित परंपरा के बीच मुख्यमंत्री का यह कदम भी आयोजन का प्रमुख दृश्य रहा।

लाखों की भीड़, लेकिन सबसे बड़ा सवाल फिर भी बाकी

करम महाजुड़ान में समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक शक्ति साफ दिखाई दी। मंच से विकास, भाषा, मुकदमे और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े कई ऐलान हुए। लेकिन इन तमाम घोषणाओं के बीच कुड़मी समाज की सबसे महत्वपूर्ण और लंबे समय से चली आ रही मांग—अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा—पर मुख्यमंत्री की ओर से कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई। यही इस विशाल महाजुड़ान का सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल भी रहा।

जमीनी आवाज की नजर में सवाल सिर्फ घोषणाओं का नहीं, उनके क्रियान्वयन का भी है।