आसमान में टूटते तारों का अद्भुत नजारा! 21-22 अक्टूबर को चरम पर होगी ओरियोनिड्स उल्का वर्षा


हेली धूमकेतु के छोड़े हुए कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर बनाएंगे चमकदार लकीरें; अनुकूल परिस्थितियों में प्रति घंटे 15 से 20 उल्काएं दिखने की संभावना...

 आधी रात के बाद आसमान पर रखें नजर; जानिए ओरियन तारामंडल की पहचान, उल्का वर्षा देखने का सही तरीका और वर्ष 2061 में लौटने वाले हैली धूमकेतु का रहस्य।

जमीनी आवाज | विशेष खगोलीय रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश| असित भट्टाचार्य

21 अक्टूबर की रात आसमान में शुरू होगा खगोलीय रोमांच

आसमान में अचानक चमकती हुई रोशनी की एक लकीर दिखाई दे और कुछ ही पलों में गायब हो जाए, तो आम बोलचाल में इसे टूटता हुआ तारा कहा जाता है। लेकिन वास्तव में यह कोई तारा नहीं होता, बल्कि अंतरिक्ष से आया धूल या चट्टानी पदार्थ का छोटा कण होता है, जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने पर चमकने लगता है।

21 अक्टूबर 2026 की रात से 22 अक्टूबर की भोर तक खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों को ऐसी ही एक दिलचस्प घटना देखने का अवसर मिलेगा। इस दौरान प्रसिद्ध ओरियोनिड्स उल्का वर्षा अपने चरम के आसपास रहने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक दृश्यता मौसम, चंद्रमा की रोशनी और आसपास के कृत्रिम प्रकाश पर निर्भर करेगी।

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का संबंध प्रसिद्ध हैली धूमकेतु से है। पृथ्वी हर साल अक्टूबर में उस क्षेत्र से गुजरती है, जहां इस धूमकेतु द्वारा छोड़े गए धूल के सूक्ष्म कण मौजूद हैं। जब ये कण पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक गति से प्रवेश करते हैं, तो चमकदार लकीरों के रूप में दिखाई देते हैं।

ओरियोनिड्स की विशेषता इनकी तेज गति है। इनके कण लगभग 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से वायुमंडल में प्रवेश कर सकते हैं। यही वजह है कि साफ और अंधेरे आसमान में दिखाई देने वाली इनकी चमकदार लकीरें दर्शकों को रोमांचित करती हैं।

क्या होती है ओरियोनिड्स उल्का वर्षा?

उल्का वर्षा का नाम सुनकर बारिश या पानी की बौछार जैसा दृश्य मन में आ सकता है, लेकिन इसका वास्तविक स्वरूप अलग होता है। इसमें पानी की बूंदें नहीं गिरतीं, बल्कि अंतरिक्ष से आने वाले छोटे-छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और चमकदार लकीरों के रूप में दिखाई देते हैं।

आमतौर पर इन्हें टूटता तारा कहा जाता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह नाम सही नहीं है। तारे पृथ्वी से बहुत दूर स्थित विशाल खगोलीय पिंड हैं। उल्का की चमक पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाले छोटे अंतरिक्षीय कणों की वजह से दिखाई देती है।

ओरियोनिड्स उल्का वर्षा हर साल अक्टूबर में सक्रिय रहती है। इसकी गतिविधि सामान्यतः अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से नवंबर के शुरुआती दिनों तक देखी जा सकती है। चरम अवधि में अनुकूल परिस्थितियों के दौरान प्रति घंटे लगभग 10 से 20 उल्काएं देखने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, यह संख्या हर स्थान पर समान नहीं होती।

किसी शहर में प्रदूषण, धुंध और तेज रोशनी के कारण बहुत कम उल्काएं दिखाई दे सकती हैं, जबकि साफ और अंधेरे स्थान पर अनुभव बेहतर हो सकता है।

कभी-कभी कुछ उल्काएं सामान्य से अधिक चमकीली दिखाई देती हैं। इन्हें फायरबॉल कहा जाता है। हालांकि, ऐसी चमकीली उल्काओं का दिखाई देना निश्चित नहीं है।

किस दिशा में दिखाई देंगी ओरियोनिड्स उल्काएं?

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, ओरियोनिड्स उल्काएं ओरियन तारामंडल की दिशा से आती हुई प्रतीत होती हैं। ओरियन को हिंदी में कालपुरुष तारामंडल भी कहा जाता है।

उल्का वर्षा में जिस बिंदु से उल्काएं आती हुई प्रतीत होती हैं, उसे रेडिएंट या दीप्तिमान बिंदु कहा जाता है। ओरियोनिड्स का नाम भी ओरियन तारामंडल से ही पड़ा है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि उल्काएं केवल इसी तारामंडल के आसपास दिखाई देंगी। वास्तव में वे आकाश के किसी भी हिस्से में चमकती हुई नजर आ सकती हैं। उनकी चमकदार लकीरों का रास्ता पीछे की ओर बढ़ाने पर वे ओरियन तारामंडल के दीप्तिमान बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं।

इसलिए उल्का वर्षा देखने वालों को केवल एक दिशा में नजर टिकाकर नहीं बैठना चाहिए। पूरे आकाश को देखने की कोशिश करें। इससे उल्का दिखाई देने की संभावना बढ़ सकती है।

कैसे पहचानें ओरियन तारामंडल?

ओरियन तारामंडल को पहचानने का सबसे आसान तरीका उसके बीच में एक सीध में दिखाई देने वाले तीन चमकीले तारों को खोजना है। इन तीन तारों को ओरियन की बेल्ट कहा जाता है।

इन तीन तारों को पहचान लेने के बाद आसपास के तारों की बनावट देखकर पूरे तारामंडल का अनुमान लगाया जा सकता है।

अक्टूबर के उत्तरार्ध में उत्तरी गोलार्ध से ओरियन तारामंडल रात बढ़ने के साथ पूर्वी आकाश में दिखाई देने लगता है और बाद में ऊंचाई पर पहुंचता है। आधी रात के बाद और भोर से पहले इसे पहचानना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

हालांकि, तारामंडल की दिशा और ऊंचाई देखने वाले के स्थान तथा समय के अनुसार बदलती है। इसलिए स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से आकाश का अवलोकन करना चाहिए।

उल्का वर्षा देखने के लिए दूरबीन या टेलीस्कोप की जरूरत नहीं है। सामान्य आंखों से पूरे आकाश को देखना अधिक उपयोगी हो सकता है, क्योंकि उल्काएं बहुत तेजी से आकाश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक गुजर सकती हैं।

21 और 22 अक्टूबर की रात कब होगा सबसे अच्छा समय?

ओरियोनिड्स उल्का वर्षा देखने के लिए 21 अक्टूबर की देर रात से 22 अक्टूबर की भोर तक का समय महत्वपूर्ण रहेगा। सामान्य तौर पर आधी रात के बाद से सुबह होने तक उल्काएं देखने का अच्छा अवसर मिल सकता है, क्योंकि इस दौरान ओरियन तारामंडल आकाश में अधिक ऊंचाई पर पहुंचता है।

हालांकि, देखने का सबसे अच्छा समय स्थानीय मौसम, चंद्रमा की स्थिति और आकाश की स्वच्छता पर निर्भर करेगा। चंद्रमा की तेज रोशनी रहने पर कम चमकीली उल्काओं को देखना मुश्किल हो सकता है। यदि चंद्रमा अस्त होने के बाद आकाश अधिक अंधेरा हो, तो अवलोकन की परिस्थितियां बेहतर हो सकती हैं।

इसलिए दर्शकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने इलाके में चंद्रमा के अस्त होने का समय पता कर लें और सुरक्षित स्थान से आसमान का अवलोकन करें।

एक घंटे में कितनी उल्काएं दिखाई दे सकती हैं?

ओरियोनिड्स उल्का वर्षा के चरम के दौरान अनुकूल परिस्थितियों में प्रति घंटे लगभग 15 से 20 उल्काएं दिखाई देने की संभावना बताई जाती है। लेकिन इसे हर स्थान पर दिखाई देने वाली उल्काओं की निश्चित संख्या नहीं समझना चाहिए।

शहरों में कृत्रिम रोशनी, धूल, धुंध, बादल और चंद्रमा की चमक के कारण वास्तविक संख्या काफी कम हो सकती है। खुले और अंधेरे स्थानों पर देखने वालों को बेहतर अनुभव मिल सकता है।

उल्काओं को देखने के लिए धैर्य जरूरी है। संभव है कि कुछ मिनटों तक कोई चमकदार लकीर दिखाई न दे और फिर अचानक एक या अधिक उल्काएं नजर आ जाएं।

कुछ उल्काएं अपने पीछे चमकती हुई लकीर छोड़ सकती हैं, जो कुछ क्षणों तक बनी रह सकती है। हालांकि, हर उल्का का दृश्य एक जैसा नहीं होता।

हैली धूमकेतु: ओरियोनिड्स का असली स्रोत

ओरियोनिड्स उल्का वर्षा की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसका संबंध सौर मंडल के सबसे प्रसिद्ध धूमकेतुओं में से एक, हैली धूमकेतु से है।

हैली धूमकेतु का आधिकारिक नाम 1P/Halley है। यह लगभग 75 से 76 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। इसकी खास पहचान यह है कि खगोलविद एडमंड हैली ने पुराने खगोलीय प्रेक्षणों का अध्ययन कर अनुमान लगाया था कि अलग-अलग समय पर दिखाई देने वाले कुछ धूमकेतु वास्तव में एक ही धूमकेतु के लौटने के दृश्य थे।

बाद में इसकी वापसी की पुष्टि हुई और धूमकेतु का नाम एडमंड हैली के सम्मान में रखा गया।

हैली धूमकेतु सूर्य के पास से गुजरते समय गर्म होता है और उससे गैस तथा धूल के कण निकलते हैं। ये कण धूमकेतु की कक्षा के आसपास बिखरे रह जाते हैं। पृथ्वी जब इस मलबे वाले क्षेत्र से गुजरती है, तो कुछ कण हमारे वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और उल्काओं के रूप में चमकते हैं।

हैली धूमकेतु का पिछला आगमन 1986 में हुआ था। इसका अगला आगमन वर्ष 2061 में अपेक्षित है। लेकिन इसे देखने के लिए 2061 तक इंतजार करना जरूरी नहीं है। इसके द्वारा छोड़े गए मलबे से बनने वाली ओरियोनिड्स उल्का वर्षा हर साल अक्टूबर में दिखाई देती है।

हैली धूमकेतु से जुड़ी दूसरी उल्का वर्षा कौन-सी है?

हैली धूमकेतु केवल ओरियोनिड्स का ही स्रोत नहीं है। इससे जुड़ी दूसरी प्रमुख उल्का वर्षा एटा एक्वेरिड्स है, जो सामान्यतः मई की शुरुआत में सक्रिय रहती है।

ओरियोनिड्स और एटा एक्वेरिड्स दोनों का संबंध हैली धूमकेतु द्वारा छोड़े गए कणों से है। पृथ्वी अपनी वार्षिक यात्रा के दौरान धूमकेतु के मलबे वाले अलग-अलग हिस्सों से गुजरती है। इसी वजह से साल के अलग-अलग समय पर ये दोनों उल्का वर्षाएं दिखाई देती हैं।

इस प्रकार, अक्टूबर में ओरियोनिड्स देखना उस प्रसिद्ध धूमकेतु द्वारा छोड़े गए पदार्थ के कुछ अंशों को देखने जैसा है, जो इस समय पृथ्वी के पास नहीं है।

उल्का वर्षा देखने के लिए क्या करें?

खगोलीय घटना का बेहतर अनुभव लेने के लिए कुछ आसान सावधानियां अपनाई जा सकती हैं।

पहली बात: ऐसी जगह चुनें जहां स्ट्रीट लाइट, वाहनों की तेज रोशनी और इमारतों की चमक कम हो। सुरक्षित और खुला स्थान बेहतर रहेगा।

दूसरी बात: आंखों को अंधेरे के अनुरूप ढलने के लिए लगभग 20 से 30 मिनट का समय दें। इस दौरान मोबाइल फोन की तेज रोशनी से बचें। बार-बार मोबाइल की स्क्रीन देखने से अंधेरे में देखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

तीसरी बात: दूरबीन या टेलीस्कोप की जरूरत नहीं है। आराम से लेटकर या किसी झुकने वाली कुर्सी पर बैठकर पूरे आकाश को देखना अधिक उपयोगी हो सकता है।

चौथी बात: मौसम की स्थिति जरूर जांचें। बादल छाए रहने या धुंध होने पर उल्काएं दिखाई देना मुश्किल हो सकता है।

पांचवीं बात: रात में बाहर निकलते समय सुरक्षा का ध्यान रखें। सुनसान सड़क, रेलवे लाइन, नदी किनारे या किसी असुरक्षित स्थान पर अकेले न जाएं। संभव हो तो किसी साथी के साथ सुरक्षित स्थान पर जाएं।

सोशल मीडिया के भ्रामक दावों से रहें सावधान

डिजिटल दौर में खगोलीय घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे प्रसारित होते रहते हैं। कई बार सामान्य उल्का वर्षा को लेकर भी असाधारण घटनाओं, आसमान में भारी रोशनी या किसी बड़े खतरे की बातें कही जाने लगती हैं।

ओरियोनिड्स एक नियमित खगोलीय घटना है। इसका संबंध हैली धूमकेतु के मलबे और पृथ्वी की वार्षिक गति से है। इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण या महंगे इंतजाम की आवश्यकता नहीं है। सही समय, अंधेरा आसमान और थोड़ा धैर्य पर्याप्त हो सकता है।

पाठकों को चाहिए कि वे अप्रमाणित सूचनाओं पर भरोसा करने के बजाय विश्वसनीय वैज्ञानिक संस्थानों और खगोल विज्ञान के विशेषज्ञों की जानकारी को प्राथमिकता दें।

जमीनी आवाज की अपील: आसमान को जानिए, विज्ञान को समझिए

21 अक्टूबर की रात से 22 अक्टूबर की भोर तक होने वाली ओरियोनिड्स उल्का वर्षा आम लोगों, विद्यार्थियों, विज्ञान में रुचि रखने वालों और आकाश को निहारने के शौकीनों के लिए प्रकृति की एक दिलचस्प प्रस्तुति है।

इस घटना के बहाने नई पीढ़ी को खगोल विज्ञान के प्रति जागरूक करने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर भी मिलता है। आसमान में दिखाई देने वाली हर चमक को चमत्कार मान लेने के बजाय उसके पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को समझना ही वास्तविक ज्ञान की दिशा है।

हैली धूमकेतु के छोड़े हुए कण जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेंगे, तो उनमें से कुछ क्षणभर के लिए चमकते हुए दिखाई देंगे। संभव है कि आपको कई उल्काएं दिखें और संभव है कि मौसम या रोशनी के कारण कम दिखाई दें। लेकिन यदि आसमान साफ रहा और आपने अंधेरे में धैर्यपूर्वक आकाश को देखा, तो यह अनुभव अपने आप में खास हो सकता है।

रिपोर्ट: खगोलविद अमर पाल सिंह के साथ असित भट्टाचार्य

संपादक, जमीनी आवाज